हरियाणा के करनाल की मीरा घाटी में 82 साल के डॉक्टर हरकिशन की जिंदगी एक मिसाल है। वो होम्योपैथिक डॉक्टर हैं और पिछले कई दशक से लोगों का इलाज कर रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने अपने इलाज के लिए कभी पैसे नहीं मांगे। जो भी मर्जी से दे गया, उसी से उनका खर्च चलता रहा। उनके घर में अब भी हजारों किताबें सजी हैं, होम्योपैथी और चिकित्सा पर। पढ़ाई और अपने पेशे से उनका लगाव साफ दिखता है। लोग बताते हैं कि डॉक्टर साहब नब्ज देखकर दवा देने में माहिर थे। गरीबों के लिए तो वो किसी फरिश्ते से कम नहीं थे। दुख की बात ये है कि दूसरों की मदद करते-करते वो खुद अकेले रह गए। जिंदगी के आखिरी पड़ाव में उनके पास न परिवार था, न कोई अपना।
परिवार से दूर रहकर अकेले काट रहे है जीवन
डॉक्टर हरकिशन पिछले 26 साल से अकेले रह रहे थे। पत्नी से मनमुटाव हुआ, बात इतनी बढ़ी कि दोनों अलग हो गए। मकान को लेकर विवाद था, पत्नी चाहती थीं कि घर बेचकर सेक्टर में शिफ्ट हो जाएं, लेकिन डॉक्टर साहब इस घर से जुड़ाव छोड़ नहीं पाए। आखिर में पत्नी ने अलग रहने का फैसला कर लिया। बेटा-बेटी, दोनों ऑस्ट्रेलिया में बस गए। परिवार से बात भी कम ही होती थी। वक्त के साथ डॉक्टर साहब अंदर से टूटने लगे। उम्र बढ़ी, तो सेहत भी साथ छोड़ने लगी। परिवार की कमी उनके चेहरे पर तो कम ही दिखी, लेकिन पड़ोसी बताते हैं कि भीतर-भीतर वो बहुत अकेलेपन से जूझ रहे थे। उन्होंने कभी किसी से शिकायत नहीं की, बस चुपचाप अपनी हालत सहते रहे।
डेढ़ साल से बदहाल जीवन बिता रहें
पिछले डेढ़ साल में तो हालात और बिगड़ गए। डॉक्टर साहब ने लंबे वक्त तक कपड़े तक नहीं बदले। घर बिखरा पड़ा था। जो भी खाने को मिल जाता, उसी में गुजारा चलता। कभी-कभी कोई पड़ोसी चाय-नाश्ता दे जाता, पर ये मदद रोज नहीं मिलती थी। धीरे-धीरे उनकी तबीयत और गिरने लगी। जब मोहल्ले वालों को असलियत पता चली, तो उन्होंने “अपना आशियाना” नाम की संस्था से मदद मांगी। संस्था की टीम आई और डॉक्टर साहब को बेहद खराब हालत में घर से निकालकर आश्रम ले गई। इस रेस्क्यू का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ, लोगों की आंखें भर आईं। वीडियो में साफ दिख रहा था कि डॉक्टर साहब बेहद कमजोर हो चुके थे और किसी भी तरह की मदद के मोहताज थे।
A deeply disturbing video has surfaced from #Karnal.
— Indian Doctor🇮🇳 (@Indian__doctor) February 24, 2026
An elderly doctor was found living alone in extremely pathetic and neglected conditions inside his own home.
His son and daughter are settled in Australia. Reportedly, he had not even changed his clothes for nearly one and a… pic.twitter.com/O0KZDJIAtW
समाज के लिए सवाल
अब डॉक्टर हरकिशन संस्था की देखरेख में हैं, हालत स्थिर है। उनका घर बंद पड़ा है, परिवार की तरफ से अब तक कोई खबर नहीं आई है। ये सिर्फ एक बूढ़े डॉक्टर की कहानी नहीं, बल्कि हम सबके लिए एक सवाल है, हम अपने बुजुर्गों की परवाह करते हैं? पूरी जिंदगी दूसरों की सेवा करने वाला इंसान आखिरकार अकेले रह गया। ये सोचने वाली बात है कि बुजुर्गों की देखभाल सिर्फ घरवालों की जिम्मेदारी नहीं है, समाज को भी आगे आना चाहिए। पड़ोसियों और संस्था की मदद से वक्त रहते उनकी जान तो बच गई, लेकिन ये कहानी बताती है कि इमोशनल सहारा भी जरूरी है, सिर्फ दवा या पैसे से सब नहीं चलता।
डॉक्टर हरकिशन की जिंदगी ने ये सबक दिया है कि हमें अपने आसपास के बुजुर्गों पर नजर रखनी चाहिए। वक्त रहते उनका साथ दें, कभी-कभी एक छोटी सी मदद किसी की पूरी जिंदगी बदल देती है।
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