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‘भाषा के नाम पर आतंक फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो’,संजय निरुपम ने फिजिक्स वाला हमले में मकोका लागू करने की उठाई मांग

मुंबई में प्रेस वार्ता के दौरान संजय निरुपम ने मराठी भाषा के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। फिजिक्स वाला कोचिंग हमले को "आतंक की राजनीति" बताया।

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शिवसेना के उपनेता और प्रवक्ता संजय निरुपम ने ठाकरे परिवार पर जाति और भाषा की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए, भाषा के नाम पर आतंक फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। अंधेरी में एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। संजय निरुपम ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे और उनके समर्थकों द्वारा नासिक में फिजिक्स वाला कोचिंग संस्थान में एक कर्मचारी के साथ की गई मारपीट की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह कोचिंग संस्थान उत्तर भारत से जुड़ा हुआ है और वहां हाल ही में आए शिक्षकों पर मराठी बोलने का दबाव डालकर हमला किया गया। निरुपम ने इसे भाषा के नाम पर गुंडागर्दी और आतंकवाद करार देते हुए नासिक पुलिस से त्वरित और कठोर कार्रवाई की अपील की।

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मकोका के तहत दोषियों पर करवाई की मांग

निरुपम ने आगे कहा कि इस मामले में यह भी सामने आया है कि मनसे कार्यकर्ता कोचिंग संस्थान के मालिक से हफ्ता वसूली कर रहे थे। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषियों के खिलाफ मकोका के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे मराठी भाषा के विरोधी नहीं हैं, क्योंकि यह महाराष्ट्र की मातृभाषा है और हर किसी को इसे सीखना चाहिए। लेकिन, भाषा के नाम पर नफरत और हिंसा को बढ़ावा देना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि महायुति सरकार ने मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा दिलाया, और यही कारण है कि नफरत फैलाने वालों को स्थानीय चुनावों में करारा जवाब मिला।

संजय निरुपम का उबाठा पर आरोप

संजय निरुपम ने उबाठा पर हमला बोलते हुए कहा कि परभणी नगर निगम में मुस्लिम महापौर बनाने से उबाठा का मुस्लिम समुदाय के प्रति झुकाव साफ हो गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब परभणी में कांग्रेस के साथ मिलकर मुस्लिम महापौर बनाया गया, तो मुंबई में मराठी महापौर का मुद्दा सिर्फ वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा क्यों था? निरुपम ने यह भी आरोप लगाया कि उबाठा ने बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों को छोड़कर मुस्लिम वोट बैंक के लिए कांग्रेस की राह अपनाई, और इसी कारण मुंबई नगर निगम चुनाव में उबाठा को हार का सामना करना पड़ा।

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बालासाहेब की विरासत और वर्तमान नेतृत्व

निरुपम ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने कभी भी देशभक्त मुसलमानों के खिलाफ नहीं बोला, लेकिन उबाठा ने अब उनके विचारों से भटककर राजनीति की दिशा बदल दी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज मुंबई और महाराष्ट्र में हिंदू समाज के अधिकारों की रक्षा और बालासाहेब की विचारधारा को जीवित रखने का काम शिवसेना के मुख्य नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कर रहे हैं। इसके अलावा, निरुपम ने मुंबई में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत भी जताई।

Keywords: Sanjay Nirupam Press Conference, Raj Thackeray Language Politics, MCOCA Demand Action, Balasaheb Thackeray Legacy

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