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धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान, ‘मठ से बाहर निकलना होगा, माला और भाला रखना पड़ेगा’

छतरपुर के गढ़ा में सामूहिक विवाह समारोह में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि केवल धार्मिक जप से धर्म सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्होंने युवाओं और महिलाओं को आत्मरक्षा विधाएं, जैसे जूडो-कराटे, सीखने की सलाह दी।

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बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने छतरपुर जिले के गढ़ा में आयोजित 301 कन्याओं के विवाह समारोह में कहा कि धर्म केवल राम-सीता के जाप से नहीं बच सकता। उनका यह बयान अब चर्चा का विषय बन गया है। शास्त्री ने आगे कहा कि आत्मरक्षा भारत के नागरिकों का अधिकार है, और युवाओं को जूडो, कराटे, तीरंदाजी, तथा तलवारबाजी जैसी कला सीखनी चाहिए। उनका मानना है कि सिर्फ धार्मिक मंत्रों से धर्म की रक्षा नहीं हो सकती।

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“मठ से बाहर निकलना होगा”

कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि हिन्दुत्व की रक्षा करनी है, तो मठ में बैठकर नहीं, बल्कि मठ से बाहर निकलकर काम करना होगा और माला के साथ भाला भी रखना होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मठ में बैठकर सीता-राम का जाप करना आसान है, लेकिन धर्म की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से बाहर आकर काम करना जरूरी है। उनका कहना था कि आत्मरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।

आत्मरक्षा प्रशिक्षण पर विशेष बल

धीरेंद्र शास्त्री ने अपने भाषण में विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं को आत्मरक्षा के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जूडो, कराटे और अन्य मार्शल आर्ट्स केवल मुसीबत के वक्त ही नहीं, बल्कि हर किसी के लिए जरूरी कौशल हैं। उनका मानना था कि यह आत्मरक्षा का अधिकार संविधान द्वारा सभी नागरिकों को दिया गया है, न कि किसी एक वर्ग को। उन्होंने धार्मिक आस्था और सजगता को एक साथ जोड़ते हुए इस अधिकार का सही उपयोग करने की बात भी की।

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पहले भी दे चुके हैं समान विचार

यह पहला मौका नहीं है जब धीरेंद्र शास्त्री ने इस तरह के बयान दिए हैं। इससे पहले भी वह कई बार आत्मरक्षा और हिन्दुत्व को लेकर अपने विचार सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर चुके हैं। उनके बयानों को लेकर हमेशा राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है। ताजे बयान के बाद भी विभिन्न वर्गों से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, और यह विषय अब भी लोगों के बीच चर्चा का कारण बना हुआ है।

विवाह समारोह की विस्तृत तैयारियां और घोषणाएं

13 फरवरी से 300 कन्याओं के विवाह कार्यक्रम की शुरुआत हो जाएगी। इस दौरान 13 फरवरी को मेंहदी की रस्म, 14 फरवरी को संगीत और 15 फरवरी को सात फेरे, बारात और विदाई होगी। प्रत्येक जोड़े को 30,000 रुपये की एफडी दी जाएगी, साथ ही उन्हें सोने की लौंग और बाली भी उपहार स्वरूप मिलेंगे। दुल्हनों को मंगसूत्र के अलावा ढाई लाख रुपये की राशि भी प्रदान की जाएगी। यह आयोजन विशेष रूप से विवाह के प्रति समाज की सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

Keywords: Dhirendra Shastri Speech, Self-Defense Training, Hindutva Protection, Mass Wedding Ceremony

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