मंगलवार को जब सुनेत्रा पवार मंत्रालय पहुंचीं, तो ये सिर्फ एक औपचारिक दिन नहीं था। उनके लिए ये बहुत निजी और भावनाओं से भरा हुआ था। उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालने से पहले, उनकी नजर उस कुर्सी पर पड़ी, जिस पर अजित पवार ने छह बार बैठकर यही पद संभाला था। कुछ पल वे चुपचाप वहीं खड़ी रहीं। उन्होंने कुर्सी को प्रणाम किया, दिवंगत नेता को याद किया, फिर पहली बार उस पर बैठीं। केबिन में लगी अजित पवार की प्रतिमा के सामने उन्होंने सिर झुकाया।
ये देखकर वहां मौजूद अफसर, पार्टी नेता और परिवार के लोग भी खुद को रोक नहीं पाए। बेटे पार्थ पवार की आंखों में भी आंसू थे। ये एक पल महज सत्ता परिवर्तन का नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक विरासत और परिवार में आई खाली जगह का अहसास था।
NCP’s Sunetra Pawar takes charge as Deputy Chief Minister of Maharashtra at her office in Mantralaya pic.twitter.com/RcnjTkp4MN
— Richa Pinto (@richapintoi) February 10, 2026
आस्था और संविधान के साथ नई शुरुआत
मंत्रालय जाने से पहले ही सुनेत्रा पवार ने दिन की शुरुआत आस्था से की। मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचीं, भगवान गणेश के दर्शन किए और नई जिम्मेदारी के लिए आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे चैत्यभूमि पहुंचीं, जहां डॉ. भीमराव अंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित की। यहां उन्हें संविधान की एक प्रति और कलम मिली, जो राजनीतिक गलियारों में बड़ा प्रतीक माना जा रहा है। साफ था, सुनेत्रा पवार अपनी भूमिका में संविधान और सामाजिक न्याय को सबसे ऊपर रखने का इरादा दिखा रही हैं। फिर वे मंत्रालय पहुंचीं और उपमुख्यमंत्री का औपचारिक कार्यभार संभाला।
पार्टी के बड़े नेता मौजूद ‘
जिम्मेदारी संभालने से पहले सुनेत्रा पवार एनसीपी दफ्तर भी गईं। अजित पवार की तस्वीर पर फूल चढ़ाए, कुछ पल यादों के साथ रुक गईं। वहां पार्टी और सरकार के कई बड़े नेता मौजूद थे, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, धनंजय मुंडे, हसन मुश्रीफ, रुपाली चाकणकर समेत कई मंत्री-विधायक। ये सिर्फ रस्मी उपस्थिति नहीं थी। पार्टी की एकजुटता और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व पर भरोसे का इशारा था। नेताओं ने उनके अनुभव और धैर्य की तारीफ की और उम्मीद जताई कि वे इस मुश्किल दौर में महाराष्ट्र को स्थिर नेतृत्व देंगी।
राजनीतिक इतिहास का नया मोड़
सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की 13वीं उपमुख्यमंत्री बनीं, लेकिन इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला भी हैं। इससे पहले किसी महिला को ये जिम्मेदारी नहीं मिली थी। वे राज्यसभा सांसद रह चुकी हैं, संसदीय कामकाज का तजुर्बा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वे जल्द ही बारामती से विधानसभा चुनाव लड़ेंगी, ये सीट अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई है और पवार परिवार का गढ़ रही है। सुनेत्रा पवार का जन्म धाराशिव (पहले उस्मानाबाद) में हुआ था। अब तक उनकी राजनीतिक यात्रा शांत लेकिन निर्णायक रही है। उपमुख्यमंत्री के तौर पर उनका चयन न सिर्फ संवैधानिक जिम्मेदारी है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में महिला नेतृत्व के लिए एक मजबूत संदेश भी देता है।
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