मुंबई: मुंबई नगर निगम चुनाव खत्म हो चुके हैं, और अब बीएमसी को स्थायी मेयर मिलने का वक्त आ गया है। मेयर और डिप्टी मेयर के नाम लगभग फाइनल हैं, बस थोड़ा सा औपचारिक नामांकन और चुनाव बाकी रह गया है। इस बार का चुनाव वैसे भी खास है, क्योंकि पहली बार बीजेपी यहां अपना मेयर बनाने जा रही है। पार्टी ने मेयर के लिए रीतू तावड़े को चुना है, जो जल्द ही नामांकन दाखिल करेंगी।
बीजेपी के लिए ये सिर्फ एक पद नहीं है, बल्कि मुंबई की राजनीति में बड़ी जीत है। शायद इसी खुशी में बीएमसी के बीजेपी दफ्तर में खास धार्मिक पूजा हुई। मेयर के नाम के ऐलान से पहले वेद मंत्रों और शंखनाद की गूंज सुनाई दी, जिससे पार्टी का जोश और भरोसा साफ झलक रहा था। बीएमसी में पार्षदों की आवाजाही भी शुरू हो गई है, और माहौल में सत्ता परिवर्तन की हलचल महसूस हो रही है।
महायुति को मिला खुला बहुमत, सत्ता में संतुलन भी
15 जनवरी 2026 को हुए बीएमसी चुनाव में बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के महायुति गठबंधन ने साफ बहुमत पा लिया। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी, उसके खाते में करीब 89 सीटें आईं, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) को 29 सीटें मिलीं। कुल मिलाकर महायुति के पास 118 से ज्यादा सीटें हैं, जबकि बहुमत के लिए 114 सीटें चाहिए थीं। इसी समीकरण की वजह से मेयर की कुर्सी बीजेपी को मिली, और डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी शिवसेना के पास गई। शिवसेना की तरफ से संजय घाड़ी उप महापौर के लिए नामांकन भरेंगे और उनका कार्यकाल सवा साल का रहेगा। ये सत्ता साझेदारी महायुति के भीतर संतुलन बनाए रखने के लिए सोची-समझी रणनीति है, ताकि गठबंधन मजबूती से टिका रहे।
रीतू तावड़े ने 2012 में कांग्रेस छोड़ बीजेपी ज्वाइन की थी
रीतू तावड़े घाटकोपर से तीसरी बार बीएमसी पार्षद बनी हैं। नगर निगम में लंबा अनुभव और प्रशासनिक समझ उनके पक्ष में जाता है। इससे पहले वे बीएमसी की शिक्षा समिति की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं, जहां स्कूलों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने खुलकर काम किया। फिलहाल वे महाराष्ट्र प्रदेश महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष भी हैं। रीतू तावड़े को लोग जमीनी नेता मानते हैं। वो नागरिकों की दिक्कतें सुनती हैं और उन्हें हल कराने में आगे रहती हैं। दिलचस्प बात ये है कि मराठा समुदाय से होने के बावजूद उन्होंने गुजराती बहुल वार्ड में भी अपनी पकड़ बना ली है। 2012 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन की थी, और तब से लगातार पार्टी में उनका कद बढ़ता गया।
चार साल बाद बीएमसी को मिलेगा चुना हुआ नेतृत्व
बीएमसी में पिछला मेयर चुनाव 2017 में हुआ था। उसके बाद राजनीतिक अस्थिरता और बाकी वजहों से नगर निगम में प्रशासक का राज चल रहा था। करीब चार साल तक मुंबई की सबसे बड़ी स्थानीय संस्था बिना निर्वाचित नेतृत्व के रही। अब 2026 में फिर से मेयर का चुनाव हो रहा है, और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की वापसी मानी जा रही है।
इस बार मेयर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है। लॉटरी के जरिए रीतू तावड़े का नाम सामने आया, और बीजेपी ने उन्हें ऑफिशियल उम्मीदवार बना दिया। पार्टी को भरोसा है कि उनके नेतृत्व में बीएमसी की विकास योजनाओं को नई रफ्तार मिलेगी। मुंबई की राजनीति के लिए ये बदलाव आने वाले समय में काफी मायने रखेगा।
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