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देशभर में आज ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’, ओला-उबर-रैपिडो ड्राइवरों की हड़ताल..सरकार के सामने रखी ये दो मांग

आज ओला-उबर-रैपिडो ड्राइवरों यूनियनों ने कम से कम किराया तय करने और निजी गाड़ियों को व्यवसायिक उपयोग में लाने पर पाबंदी लगाने की मांग करते हुए देशभर में हड़ताल का ऐलान किया है।

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देशभर में आज हड़ताल का असर साफ दिख रहा है। ओला, उबर या रैपिडो जैसी ऐप-बेस्ड टैक्सी बुक करने वाले लोगों को आज मुश्किलें झेलनी पड़ सकती हैं। वजह है इन सेवाओं से जुड़े ड्राइवरों की छह घंटे की देशव्यापी हड़ताल, जिसे ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ नाम दिया गया है। कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी, सबकी सर्विस आज सीमित रहेगी। साफ है, ऑफिस जाने वाले, स्टूडेंट्स या रोज आने-जाने वाले काफी लोग परेशान होंगे। ड्राइवर यूनियनें कह रही हैं, ये फैसला उन्होंने मजबूरी में लिया है, क्योंकि उनकी बातें कोई सुन ही नहीं रहा।

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हड़ताल के पीछे क्या हैं कारण?

इस आंदोलन की कमान तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और कई दूसरी राष्ट्रीय यूनियनों ने मिलकर संभाली है। इनका कहना है कि ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट में न तो कोई मिनिमम किराया तय है, न ही कोई ठोस रेगुलेशन है। कंपनियां अपनी मर्जी से किराया बदलती रहती हैं, जिससे ड्राइवरों की कमाई पर सीधा असर पड़ता है। यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को चिट्ठी लिखी है और देशभर के ऐप-बेस्ड ड्राइवर्स की दिक्कतें उनके सामने रखी हैं। उनका आरोप है कि मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 लागू होने के बावजूद कंपनियां नियमों को नजरअंदाज कर रही हैं।

ड्राइवरों की कमाई पर पड़ रहा असर

ड्राइवरों का कहना है कि जब तक मिनिमम बेस फेयर तय नहीं होगा, उनकी कमाई घटती ही रहेगी। पहले तय दूरी या वक्त का एक भरोसेमंद रेट था, लेकिन अब सब कुछ ऐप के एल्गोरिदम और कंपनियों की पॉलिसी पर टिका है। कभी पैसा ठीक आ जाता है, कभी बहुत कम। ऊपर से, प्राइवेट गाड़ियों से कमर्शियल राइड्स चलने लगी हैं, जिससे लाइसेंस वाले ड्राइवरों के लिए मुकाबला और मुश्किल हो गया है। यूनियन मानती है कि इससे प्रोफेशनल ड्राइवरों की आमदनी पर सीधा असर पड़ा है और उनका भविष्य असुरक्षित हो गया है।

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ड्राइवर यूनियनों की मुख्य मांगें

यूनियनों की दो बड़ी मांगे हैं। पहली, सरकार फौरन ऑटो, कैब, बाइक टैक्सी और बाकी एग्रीगेटर सेवाओं के लिए एक साफ-सुथरा, न्यूनतम बेस फेयर तय करे। यूनियन कहती है, ये फैसला ड्राइवर और वर्कर संगठनों से बातचीत के बाद ही हो, ताकि असली हालात सामने आ सकें। दूसरी मांग है, कमर्शियल पैसेंजर और गुड्स ट्रांसपोर्ट में प्राइवेट, नॉन-कमर्शियल गाड़ियों का इस्तेमाल तुरंत रोका जाए। उनका तर्क है, इससे सेक्टर में संतुलन आएगा और लाइसेंस्ड ड्राइवरों को उनका हक मिलेगा। कुल मिलाकर, ड्राइवर आज की हड़ताल के जरिए सरकार और कंपनियों से यही कहना चाहते हैं, अब और अनदेखी नहीं चलेगी, उनकी आवाज सुनी जाए।

Keywords: Ola Uber Strike, All India Breakdown, App Based Drivers Protest, Minimum Fare Demand, Ride Hailing Strike

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