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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, अजित पवार का देवगिरि बंगला अब सुनेत्रा पवार को हुआ आवंटित

महाराष्ट्र की राजनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को 'देवगिरि' बंगला और पुणे, बीड जैसे जिलों की जिम्मेदारी मिली है। पार्टी में नेतृत्व की मांग भी बढ़ी है।

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महाराष्ट्र सरकार ने मालाबार हिल के ‘देवगिरि’ बंगले को उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के आधिकारिक आवास के तौर पर मंजूरी दे दी है। ये महज़ एक कागजी औपचारिकता नहीं है, राजनीतिक गलियारों में इसे सत्ता की निरंतरता और भरोसे का संकेत माना जा रहा है। यही बंगला पहले अजीत पवार का घर था, जब वो उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष रहे। सुनेत्रा पवार पहले से यहां रह रही थीं, लेकिन अब सरकार ने इसकी आधिकारिक मुहर लगा दी। इस फैसले के पीछे सरकार ये दिखा रही है कि चेहरा बदला है, लेकिन प्रशासनिक स्थिरता और भरोसा बना रहेगा।

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पुणे और बीड की जिम्मेदारी

उपमुख्यमंत्री बनने के बाद सुनेत्रा पवार को पुणे और बीड जिलों का संरक्षक मंत्री भी बनाया गया है। ये दोनों जिले राजनीति और समाज दोनों लिहाज से खास माने जाते हैं। पहले ये जिम्मेदारी अजीत पवार के पास थी, वो इन इलाकों में मजबूत पकड़ रखते थे। अब सुनेत्रा पवार को ये जिम्मा मिला है, क्योंकि सरकार मानती है कि वो जमीन से जुड़ी जरूरतों को समझती हैं और फैसले लेने में आगे रहती हैं। इसके अलावा उनके पास आबकारी, खेल और अल्पसंख्यक कल्याण जैसे विभाग भी आए हैं, जबकि वित्त विभाग अब भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास है। ये बंटवारा साफ तौर पर सत्ता संतुलन और जिम्मेदारियों की तस्वीर पेश करता है।

अचानक शपथ ली, लेकिन सोची-समझी चाल

पिछले हफ्ते बारामती में विमान हादसे के बाद, जब अजीत पवार नहीं रहे, तो सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री की शपथ दिलाई गई। कुछ लोग कह रहे थे, सब कुछ बहुत जल्दी हुआ, लेकिन राकांपा के नेता मानते हैं कि हालात ही ऐसे थे। विधायक प्रताप चिखलीकर ने साफ कहा, ऐसे वक्त में परिवार और संगठन दोनों के लिए फौरन लीडर तय करना जरूरी था। मुश्किल घड़ी में सुनेत्रा पवार ने जिम्मेदारी ली और राजनीतिक समझदारी दिखाई। ये कदम सिर्फ सहानुभूति बटोरने के लिए नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत बनाए रखने की रणनीति भी है।

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राकांपा की कमान पर चर्चा तेज

अब सुनेत्रा पवार को लेकर बातें सिर्फ सरकारी जिम्मेदारियों तक नहीं रुक रहीं। राकांपा के भीतर भी कई नेता चाहते हैं कि वो पार्टी की कमान संभालें। प्रताप चिखलीकर समेत कई नेताओं का मानना है कि कार्यकर्ता भी यही चाहते हैं। मुंबई में हुई एक बैठक में प्रफुल पटेल और दूसरे वरिष्ठ नेताओं ने भी इस राय का समर्थन किया। हां, आखिरी फैसला अभी नहीं हुआ है, लेकिन इतना तो तय है कि सुनेत्रा पवार अब सिर्फ उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि एक अलग पहचान के साथ नेता के तौर पर देखी जा रही हैं। अब देखना है कि उनका राजनीतिक सफर प्रशासन तक सीमित रहेगा या पार्टी नेतृत्व की ओर भी बढ़ेगा।

Keywords: Maharashtra Deputy Chief Minister, Devgiri Bungalow, NCP Leadership, Pune Guardian Minister, Beed Guardian Minister

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