नई दिल्ली: चीन से जुड़े मुद्दे को लेकर सोमवार को संसद में तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सदन में पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का हवाला देते हुए सरकार से सीमा स्थिति पर जवाब मांगा। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार नोकझोंक हुई, जिसके चलते कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। हालात बेकाबू होने पर लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इस दौरान राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार पर निशाना साधते रहे। संसद से बाहर आने के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है। मुझे बस दो-तीन लाइनें बोलनी हैं, लेकिन ये लोग बोलने नहीं दे रहे हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। ये पूर्व आर्मी चीफ के शब्द हैं और यह बातचीत उन्होंने राजनाथ सिंह जी और प्रधानमंत्री मोदी के साथ की थी।”
राहुल गांधी ने कहा, “मैं सिर्फ इतना कह रहा हूं कि मैं सदन में वही बात रखना चाहता हूं, जो पूर्व आर्मी चीफ ने अपनी किताब में लिखी है कि राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री ने उनसे क्या कहा और क्या आदेश दिया। लेकिन पता नहीं ये लोग क्यों डर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री ने क्या कहा और राजनाथ सिंह जी ने क्या कहा, ज़मीन ली गई या नहीं, यह एक अलग सवाल है और हम उस पर भी आएंगे। लेकिन उससे पहले देश के नेता को दिशा दिखानी होती है। देश के नेता को फैसलों से भागना नहीं चाहिए और फैसले दूसरों के कंधों पर नहीं छोड़ने चाहिए। प्रधानमंत्री ने यही किया है।”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जनरल नरवणे ने अपनी किताब में प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लेकर साफ-साफ लिखा है, जो एक आर्टिकल में प्रकाशित हुआ है। उन्होंने कहा, “मैं उसी आर्टिकल को कोट कर रहा हूं, लेकिन वे मुझे बोलने नहीं दे रहे हैं। वे इसलिए डरे हुए हैं क्योंकि अगर यह बात सामने आ गई, तो नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह की सच्चाई देश के सामने आ जाएगी। जब चीन हमारे सामने खड़ा था और आगे बढ़ रहा था, तब 56 इंच के सीने का क्या हुआ?”
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