बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले में अब सरकार ने उनका इस्तीफा नामंजूर करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री के खिलाफ सेवा अनुशासन संबंधी कार्रवाई शुरू करने के आदेश भी दिए हैं। पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी बरेली मंडल के कमिश्नर को सौंपी गई है। वहीं, इस प्रकरण में एक नया मोड़ तब आया जब अलंकार अग्निहोत्री ने अपनी जान को खतरा होने की बात भी कही है।
इस्तीफे के बाद क्या बोले अलंकार
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में लंबे समय से ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है और लगातार उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में ब्राह्मणों के साथ मारपीट और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि कहीं एक डिप्टी जेलर द्वारा ब्राह्मण युवक की पिटाई की गई, तो कहीं एक पुलिस थाने में दिव्यांग ब्राह्मण की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिर मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के शिष्यों और बुजुर्ग संतों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। अग्निहोत्री ने ब्राह्मण समुदाय के सभी जनप्रतिनिधियों से एकजुट होकर इस्तीफा देने और समाज के साथ मजबूती से खड़े होने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते आवाज नहीं उठाई गई, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखा है और अपना इस्तीफा ई-मेल के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और जिला मजिस्ट्रेट को भेजा है।
बीजेपी नेता का बयान
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे पर भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, “न तो मैं उन्हें जानता हूं और न ही मैंने उनके बारे में पहले कभी सुना है। बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिन्हें राजनीति की बू आने लगती है और फिर वे इस तरह के बहाने तलाशने लगते हैं।”
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