कल्याण-डोंबिवली: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। हाल ही में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और महायुति के खिलाफ जमकर हमला बोला था। लेकिन राजनीति में वक्त के साथ समीकरण बदलते देर नहीं लगती। निकाय चुनावों और बीएमसी के नतीजों के बाद सत्ता में बने रहने की कवायद तेज हो गई है। इसी कड़ी में अब राजनीतिक दल एक-दूसरे को धोखा देने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।
मनसे ने दिया शिंदे सेना का साथ
एक साथ चुनाव लड़ने वाले ठाकरे ब्रदर्स अब अलग राह पर जाते नजर आ रहे हैं। दरअसल, राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) में एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। मनसे के इस फैसले के बाद शिवसेना (UBT) और मनसे के बीच एक बार फिर खटास बढ़ती दिखाई दे रही है।
उद्धव ठाकरे की नाराज़गी खुलकर सामने आई
मनसे के इस दांव के बाद शिवसेना (यूबीटी) के तेवर भी तीखे हो गए। बुधवार को हुई बैठक में उद्धव ठाकरे ने अपने पार्षदों के सामने साफ नाराजगी जताई। उन्हें शायद अंदाजा नहीं था कि हाल ही में बनी साझेदारी के बावजूद मनसे ऐसा कुछ करेगी। दरअसल, ये नाराजगी सिर्फ एक फैसले की नहीं, भरोसे की दरार की भी है। दोनों पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा था, तब लगा था कि ठाकरे परिवार की राजनीति में एकजुटता लौट रही है। मगर KDMC की ये घटना उस भरोसे को झटका देती है।
ठाकरे भाइयों की राजनीति का क्या होगा अगला कदम?
अब असली सवाल है क्या ठाकरे भाइयों की ये निकटता आगे कितनी टिकेगी? क्या ये सिर्फ चुनावी मजबूरी थी, या साथ चलने की कोई उम्मीद बची है? मौजूदा हालात बताते हैं कि दोनों दल अपने-अपने हितों को आगे रख रहे हैं। आने वाले महीनों में बीएमसी और बाकी निकायों में होने वाले फैसले इन रिश्तों की असली तस्वीर दिखाएंगे। अगर इसी तरह के फैसले होते रहे, तो शायद ये रिश्ता अब सिर्फ नाम का रह जाएगा। कुल मिलाकर, महाराष्ट्र की सियासत फिर एक बार नए समीकरणों और अनिश्चितता के दौर में है।
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