नोएडा: सेक्टर-150 में एक हादसे ने सबको हिला दिया। एक पूरा परिवार उजड़ गया। 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान चली गई, जब उनकी कार रात के अंधेरे में सड़क किनारे बने 20 फीट गहरे, पानी से भरे गड्ढे में गिर गई। वो गुरुग्राम की एक कंपनी में काम करते थे, शुक्रवार रात ड्यूटी खत्म करके घर लौट रहे थे। सड़क खराब थी, चारों तरफ अंधेरा और कहीं कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं था। हादसे के बाद घंटों तक फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस मौके पर जुटी रही, लेकिन तब तक युवराज की जिंदगी खत्म हो चुकी थी।
बिल्डर की गिरफ्तारी के साथ डेवलपर्स पर भी FIR दर्ज
जांच शुरू हुई तो पुलिस ने एमजेड विश्टाउन प्रोजेक्ट के मालिक और नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पहली नजर में साफ था, निर्माण स्थल के आसपास सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे। इससे पहले दो रियल एस्टेट डेवलपर्स पर भी FIR दर्ज हो चुकी थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए SIT बनी, जिसने मंगलवार को मौके का निरीक्षण किया। आस-पास के लोग पहले से शिकायत करते आ रहे थे, इलाके में बड़े-बड़े गड्ढे, अधूरे काम, कहीं कोई चेतावनी या बैरिकेडिंग नहीं।
VIDEO | Noida techie death: NDRF team launches operation in water-filled pit to locate the car which was being driven by software engineer Yuvraj Mehta (27) when it met with an accident due to dense fog in Noida's Sector 150 on January 16 night. Mehta died after frantically… pic.twitter.com/MkYkSuVU9V
— Press Trust of India (@PTI_News) January 20, 2026
नोएडा अथॉरिटी पर गिरी गाज
इस हादसे के बाद नोएडा अथॉरिटी भी सवालों के घेरे में आ गई। जांच के बाद इलाके के एक जूनियर इंजीनियर को नौकरी से निकाल दिया गया। बाकी जिम्मेदार अफसरों को कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों को खतरनाक गड्ढे की जानकारी थी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। अगर वक्त रहते सड़क की मरम्मत होती और सुरक्षा के इंतजाम होते, तो शायद युवराज अभी जिंदा होते।
सिस्टम पर उठे सवाल
सरकार ने भी कदम उठाया। हादसे और रेस्क्यू में देरी के आरोप लगे, तो नोएडा अथॉरिटी के सीईओ, आईएएस लोकेश एम. को उनके पद से हटा दिया गया। अब बहस छिड़ गई है कि शहरों का विकास, बिल्डर और प्रशासन की जिम्मेदारी, ये सब सिर्फ कागजों तक ही रह जाएगा या सच में बदलाव आएगा? सवाल यही है कि क्या इन कार्रवाइयों से आगे ऐसी घटनाएं रुकेंगी, या फिर ये भी बाकी फैसलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएंगी? युवराज की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, ये सिस्टम की नाकामी की बड़ी मिसाल बन गई है।
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