सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की दुद्धी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक विजय सिंह गोंड का निधन हो गया। लखनऊ के एसजीपीजीआई में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। लंबे वक्त से वे गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, दोनों किडनियां फेल होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। 71 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली।
सपा नेता अवधनारायण यादव ने उनके निधन की पुष्टि की। जैसे ही ये खबर फैली, सोनभद्र और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार होगा। स्थानीय लोग, समर्थक और आदिवासी समाज के लोग शोकसभाएं कर रहे हैं, सब उन्हें एक जमीन से जुड़े, सरल और जुझारू नेता की तरह याद कर रहे हैं।
दुद्धी से सपा विधायक श्री विजय सिंह गोंड जी का निधन, अत्यंत दुःखद !
— Samajwadi Party (@samajwadiparty) January 8, 2026
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।
शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं।
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अखिलेश यादव ने दी श्रद्धांजलि
विजय सिंह गोंड के जाने की खबर मिलते ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पीजीआई पहुंचे और परिवार वालों से मिलकर संवेदना जताई। उन्होंने कहा, “विनय (विजय) गोंड अब हमारे बीच नहीं हैं, ये पार्टी और प्रदेश की राजनीति के लिए बहुत बड़ी क्षति है।” अखिलेश यादव ने साफ कहा कि गोंड ने हमेशा आदिवासी समाज की सेवा को सबसे ऊपर रखा, और जनता ने बार-बार उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनकर उनकी मेहनत का सम्मान किया। सपा नेतृत्व के मुताबिक, गोंड सिर्फ विधायक नहीं थे, बल्कि आदिवासी अधिकारों की मजबूत आवाज़ रहे, जो विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे लगातार उठाते रहे।
दुद्धी से सपा विधायक श्री विजय सिंह गौड़ जी का निधन, अत्यंत दुःखद !
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) January 8, 2026
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।
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‘पितामह’ की पहचान
दुद्धी विधानसभा सीट को आदिवासी राजनीति का गढ़ माना जाता है। ये उत्तर प्रदेश की 403वीं और आखिरी सीट है, जो जनजाति के लिए आरक्षित है। यहां विजय सिंह गोंड को लोग ‘पितामह’ कहते थे। उनका असर सिर्फ चुनावी नतीजों तक नहीं था, बल्कि समाज में भी उनकी गहरी पकड़ थी। विधानसभा से लेकर सड़क तक, उन्होंने आदिवासी समाज की बात जोरदार तरीके से उठाई। भरोसे की राजनीति पर उनका विश्वास था, और उनके जाने से इलाके में एक बड़ा खालीपन महसूस हो रहा है, जिसे भरना आसान नहीं है।
आठ बार रह चुके है विधायक
विजय सिंह गोंड का सियासी सफर 1980 में शुरू हुआ, जब वे पहली बार कांग्रेस के टिकट पर दुद्धी से विधायक बने। 1989 में निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। फिर 1991 और 1993 में जनता दल से मैदान में उतरे और जीत गए। 1996 और 2002 में समाजवादी पार्टी का टिकट मिला और फिर से विधानसभा पहुंचे। कुल मिलाकर, वे आठ बार विधायक बने। आरक्षण के चलते दो बार खुद चुनाव नहीं लड़ पाए, लेकिन उनके समर्थन से उनके उम्मीदवार जीत गए। 2017 और 2022 के चुनावों में उन्हें करीबी हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2024 के उपचुनाव में उन्होंने फिर सपा से वापसी की। ये उपचुनाव रामदुलार गोंड के नाबालिग से दुष्कर्म मामले में सजा मिलने के बाद हुआ था। विजय सिंह गोंड की ये वापसी उनके राजनीतिक कद और जन समर्थन का बड़ा सबूत मानी गई।
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