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बीजेपी नेता नितेश राणे बोले – 15 जनवरी के बाद बदल जाएगा सबकुछ, बांग्लादेशी और रोहिंग्या को मुंबई में नहीं रहने देंगे

मुंबई महानगरपालिका चुनाव से पहले नितेश राणे के बयान ने राजनीति में हलचल मचाई। कांदिवली जनसभा में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों पर उनके कड़े शब्दों ने बहस को बढ़ा दिया।

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मुंबई: महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने मुस्लिम समुदाय और अवैध घुसपैठ पर खुलकर अपना पक्ष रखा और साथ ही ये शिकायत भी की कि लोग उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं। नितेश साफ कहते हैं, “मैं कभी पूरे मुस्लिम समाज के खिलाफ नहीं रहा।” उनके मुताबिक, जो मुसलमान राष्ट्रवादी सोच रखते हैं, वो उनके साथ हैं और उन्हें देश में बराबरी का हक मिलना चाहिए। लेकिन इसी के साथ उन्होंने ये भी कह दिया,“किसे ठोकना है, मुझे पता है।” उनके लहजे ने माहौल को और गर्मा दिया, और वैसे भी इस वक्त चुनावी माहौल पहले से ही खासा नाजुक है।

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15 जनवरी तक मुंबई से निकालने की दी धमकी

कांदिवली की एक जनसभा में नितेश राणे ने सीधे-सीधे 15 जनवरी की तारीख का जिक्र किया। बोले, 15 जनवरी के बाद मुंबई में एक भी बांग्लादेशी या रोहिंग्या नहीं रहने दूंगा। खुले मंच से उन्होंने इसे सीधी धमकी बताया और कहा कि 16 जनवरी के बाद सब कुछ बदल जाएगा। उनके समर्थकों ने इसे सख्त कार्रवाई का पैगाम माना, वहीं विरोधियों ने डर फैलाने और ध्रुवीकरण की राजनीति कहकर हमला बोला। राजनीतिक जानकार भी मानते हैं, ये बयान सीधे एक खास तबके को निशाना बनाने और चुनावी ध्रुवीकरण को हवा देने की रणनीति है।

‘मुंबई हिंदुओं की है’

नितेश राणे ने अपने भाषण में ये भी जोड़ा कि मुंबई हिंदुओं और राष्ट्रवादियों की है, यहां अवैध रोहिंग्या या बांग्लादेशियों के लिए जगह नहीं है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। विपक्ष ने इसे संविधान के खिलाफ बताया और कहा कि मुंबई सबकी है, हर भारतीय नागरिक की। बीजेपी समर्थक इसे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का मामला मान रहे हैं। ये सिर्फ अवैध घुसपैठ का मुद्दा नहीं रह गया; अब पहचान और अधिकारों की बहस भी खुलकर सामने आ चुकी है।

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बीएमसी चुनाव में बदलती सियासत

मुंबई महानगरपालिका का चुनाव इस बार दिलचस्प मोड़ पर है। पहले के गठबंधन टूट रहे हैं, नए समीकरण बन रहे हैं। बीजेपी, शिवसेना और आरपीआई (अठावले) एक साथ आ गए हैं। दूसरी तरफ, शिवसेना यूबीटी, मनसे और एनसीपी (शरद पवार) ने हाथ मिला लिया है। कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ तालमेल किया है, जबकि एनसीपी (अजित पवार) अकेले मैदान में उतर रही है। ऐसे माहौल में नितेश राणे जैसे नेताओं के तीखे बयान चुनावी बहस को और तेज कर रहे हैं।

Keywords: Nitesh Rane, BMC Election 2026, Mumbai Politics, Rohingya Issue, Maharashtra Politics, BJP, Devendra Fadnavis

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