मुंबई: इस समय अंबरनाथ नगर परिषद अचानक महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में आ गई है। हाल ही में हुए नगर परिषद चुनावों के बाद यहां जो सियासी खेल हुआ, उसने सबको चौंका दिया। बीजेपी और कांग्रेस जैसे परंपरागत प्रतिद्वंद्वी दलों ने स्थानीय स्तर पर हाथ मिलाकर शिंदे गुट की शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया। इस फैसले से शिवसेना (शिंदे गुट) तो नाराज है ही, ऊपर से महाराष्ट्र कांग्रेस ने बीजेपी से गठबंधन करने पर अपने 12 पार्षदों को निलंबित यानि ससपेंड कर दिया।
कांग्रेस ने किया 12 पार्षदों को ससपेंड
अंबरनाथ में बीजेपी के साथ गए कांग्रेस के 12 पार्षदों को पार्टी ने तुरंत सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ब्लॉक कांग्रेस की पूरी कार्यकारिणी भी भंग कर दी गई। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बिल्कुल साफ कहा, बीजेपी के साथ किसी भी लेवल पर कोई गठबंधन मंजूर नहीं है। पार्टी लाइन या विचारधारा से हटकर लिए गए फैसलों पर कार्रवाई तय है। कांग्रेस ने ये साफ कर दिया है कि लोकल दबाव या सत्ता की जोड़तोड़, पार्टी के अनुशासन से ऊपर नहीं जा सकती।
‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ का नंबर गेम
बीजेपी-कांग्रेस के इस लोकल गठबंधन का नाम रखा गया ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’। 60 सीटों वाले नगर परिषद में शिवसेना को 27 सीटें मिलीं, जो उसे सबसे बड़ी पार्टी बना गया। बीजेपी को 14, कांग्रेस को 12, एनसीपी को 4 और 2 सीटें निर्दलीयों को मिलीं। आंकड़ों के हिसाब से तो शिवसेना की सत्ता में वापसी तय लग रही थी, लेकिन बीजेपी ने कांग्रेस की मदद से नगराध्यक्ष की कुर्सी हथिया ली।
शिंदे गुट ने जताई नाराजगी
अंबरनाथ, शिंदे गुट की शिवसेना का मजबूत गढ़ माना जाता है। खुद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे यहां से सांसद हैं। ऐसे में बीजेपी का कांग्रेस के साथ जाना, शिवसेना के लिए सीधा झटका है। शिंदे गुट के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने इस गठबंधन को ‘अभद्र’ बताया और बीजेपी पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। श्रीकांत शिंदे ने भी सवाल उठाया कि जो बीजेपी बरसों से उनके साथ थी, उसने अचानक ये फैसला क्यों लिया?
बीजेपी ने दी अपनी सफाई
शिवसेना के आरोपों पर बीजेपी ने कहा कि उन्होंने तो लोकल हालात देखकर फैसला लिया। बीजेपी उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल का दावा है, उन्होंने शिंदे गुट से कई बार महागठबंधन को लेकर बात की, पर कोई जवाब नहीं मिला। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि शिंदे गुट पर पिछले सालों से भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, ऐसे में उनके साथ सत्ता बांटना ठीक नहीं था। बीजेपी की दलील है, ये फैसला किसी पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकल प्रशासन में स्थिरता लाने के लिए लिया गया।
फडणवीस ने अपने लोकल यूनिट को चेताया
मामला तूल पकड़ते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी साफ कर दिया, कांग्रेस के साथ गठबंधन पार्टी लाइन के खिलाफ है। उन्होंने इशारा किया कि अंबरनाथ का लोकल फैसला बदला जाएगा और बीजेपी कांग्रेस के साथ नहीं रहेगी। उनका बयान दिखाता है कि राज्य स्तर पर बीजेपी नेतृत्व इस पूरे मामले से दूरी बनाना चाहता है। आगे अब देखना ये है कि अंबरनाथ का गठबंधन टिका रहता है या दबाव में टूटता है। फिलहाल इतना तय है, इस प्रकरण ने महाराष्ट्र की राजनीति को फिर से उलझा और अनिश्चित बना दिया है।
Keywords: Ambernath Municipal Council, BJP Congress Alliance, Shiv Sena Shinde Faction, Devendra Fadnavis

