महाराष्ट्र: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी की स्थानीय इकाइयों द्वारा किए गए पोस्ट-पोल गठबंधनों पर तीखी नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, पार्टी लीडरशिप की इजाजत के बिना ऐसे किसी भी स्तर का गठजोड़ मंजूर नहीं है। फडणवीस ने ये भी साफ कर दिया कि जो नेता मनमानी करेंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि पार्टी ने पहले ही आदेश जारी कर दिए हैं, इन गठबंधनों को तुरंत खत्म किया जाए।
अंबरनाथ में सियासी जोड़-तोड़
सबसे ज्यादा सुर्खियों में अंबरनाथ नगर परिषद रही। यहां बीजेपी ने कांग्रेस और अजित पवार की NCP के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ बना ली। इसी गठबंधन ने बीजेपी की तेजश्री करंजुले पाटिल को अध्यक्ष की कुर्सी दिला दी। शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) की मनीषा वालेकर हार गईं। दिसंबर के चुनाव में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी थी, मगर बहुमत नहीं मिला था। बीजेपी, कांग्रेस और NCP ने निर्दलीयों का साथ लेकर बहुमत का जुगाड़ कर लिया और सत्ता पर काबिज हो गए।
जिसका शिवसेना ने खुलकर विरोध किया। उनके नेताओं ने कहा कि ये सब मौकापरस्ती है, गठबंधन धर्म के खिलाफ है। विधायक डॉ. बालाजी किनीकर ने सवाल उठाया, “कांग्रेस मुक्त भारत का नारा देने वाली बीजेपी अब कांग्रेस के साथ?” उधर, बीजेपी की दलील थी कि ये गठबंधन शहर को भ्रष्टाचार से बचाने के लिए किया गया। आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए, और राज्य की राजनीति में नई खलबली मच गई।
अकोट में भी बवाल
अकोट नगर परिषद में भी मामला कुछ ऐसा ही रहा। यहां बीजेपी ने AIMIM के साथ मिलकर ‘अकोट विकास मंच’ बना लिया। माया धुले को महापौर बना दिया गया। लेकिन फडणवीस ने इस पर भी नाराज़गी जाहिर की कहा, पार्टी की सोच और अनुशासन के खिलाफ है ये सब। उन्होंने फिर दोहराया, ऐसी राजनीति पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी, दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी अब देखना यही है, बीजेपी इन गठबंधनों से कैसे बाहर निकलती है और इसका असर महाराष्ट्र की लोकल राजनीति पर कितना पड़ता है।
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