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बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ता कहर, 3 हफ्तों में छह हिंदू युवकों को मौत के घाट उतारा

बांगलादेश में कुछ हफ्तों से हिंदू समुदाय पर हिंसा बढ़ती ही जा रही है, पिछले तीन हफ्तों में छह हिंदू युवक की कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी है। अब कट्टरपंथियों ने एक हिंदू दुकानदार की बेरहमी से हत्या कर दी है।

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बांग्लादेश: बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा थमने का नाम ही नहीं ले रही। हाल ही में, सोमवार दोपहर 45 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी की हत्या की खबर आई थी लेकिन अब कुछ घंटे बाद ही सोमवार को ही एक और हिंदू युवक मोनी चक्रवर्ती की कट्टरपंथियों ने बेरहमी से हत्या कर दी। खबरों के मुताबिक, मोनी चक्रवर्ती नरसिंग्दी जिले के पोलाश उपजिला के चोर्सिंदूर बाजार में एक छोटी सी दुकान चलाते थे। 5 जनवरी 2026 की रात करीब 10 बजे कुछ लोग अचानक उनके ऊपर धारदार हथियार लेकर टूट पड़े। वो बुरी तरह जख्मी हो गए और उनकी जान चली गई। मोनी अपने पिता मदन चक्रवर्ती के सबसे बड़े बेटे थे।

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तीन हफ्तों में ये छठी हत्या

मोनी की हत्या कोई पहला मामला नहीं है। पिछले तीन हफ्तों में हिंदू युवकों की यह छठी हत्या है। इससे पहले दीपू चंद्र दास को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था, अमृत मंडल की रहस्यमयी मौत हुई थी, मयमनसिंह में बजेंद्र बिस्वास को गोली मार दी गई थी, और खोकन दास की भीड़ के हमले में मौत हो गई। हर बार शिकार हिंदू समुदाय के लोग ही बने हैं।

विधवा महिला का गैंगरेप मामला

हिंसा की ये लहर सिर्फ हत्याओं तक सीमित नहीं है। महिलाओं के साथ भी दरिंदगी हो रही है। झेनैदाह जिले के कालिगंज इलाके में 40 साल की एक हिंदू विधवा के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ। आरोप है, कट्टरपंथियों ने पहले उसके घरवालों को कमरे में बंद किया, फिर महिला को दरिंदगी का शिकार बनाया। उसके बाद उसे पेड़ से बांधकर मारा-पीटा गया, बाल काट डाले गए। इस अमानवीय घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आरोपियों ने वायरल कर दिया। महिला बेहोश हो गई थी, लोगों ने किसी तरह अस्पताल पहुंचाया। उसने शाहीन और उसके साथी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ रहे सवाल

इन घटनाओं ने बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सबसे बड़ी बात इस पुरे घटनाकर्म पर बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद यूनुस सरकार का किसी भी तरह की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जिसके कारण, मानवाधिकार संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता खुलकर बोल रहे हैं, अगर अब भी सरकार ने कड़े कदम नहीं उठाए, तो हालात और बिगड़ सकते है। असली सवाल यही है, क्या दोषियों को सजा मिल पाएगी, या फिर ये घटनाएं भी आंकड़ों में दब जाएंगी?

Keywords: Bangladesh Hindus Violence, Hindu Killings In Bangladesh, Religious Violence, Human Rights Bangladesh, Gang Rape Incident

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