फिल्म ‘धुरंधर’ ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी। तगड़ा एक्शन, जबरदस्त किरदार, और बिजली-सी कहानी इन सबकी वजह से फिल्म ने कुछ ही हफ्तों में 800 करोड़ रुपये से ज्यादा कमा लिए। कमाई के मामले में ये फिल्म इस साल की टॉप फिल्मों में शामिल हो गई। लेकिन इस कामयाबी के साथ ही एक नया बवाल भी खड़ा हो गया, और वो है पाकिस्तान के कराची के पुराने इलाके ल्यारी में। वहां के लोगों को लगता है कि फिल्म ने ल्यारी को जिस तरह दिखाया, वो उनकी सच्चाई से बिल्कुल मेल नहीं खाता। उनका कहना है कि इससे इलाके की छवि को नुकसान पहुंच रहा है।
सोशल मीडिया पर ल्यारी की “असल तस्वीर” दिखाने की कोशिश
अब सोशल मीडिया पर कई वीडियो और फोटो वायरल हैं, जिनमें पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर्स और स्थानीय लोग ल्यारी की असली तस्वीर दिखा रहे हैं। इन वीडियो में साफ-सुथरी सड़कें, आम बाजार, स्कूल और रोजमर्रा की जिंदगियां नजर आती हैं। लोग कहते हैं कि ल्यारी अब सिर्फ अपराध और गैंगवार वाली जगह नहीं है, बल्कि यहां आम लोग शांति से रहते हैं। उनका आरोप है कि फिल्म ने पुराने दौर की कहानियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और पूरे इलाके को हिंसक दिखा दिया, जिससे दुनिया भर में गलत संदेश गया।
BREAKING: Pakistanis want @AdityaDharFilms to give Lyari a portion of Dhurandhar's profits
— Sensei Kraken Zero (@YearOfTheKraken) December 22, 2025
"Kam se kam yeh toh theek karwa lein"
🤣🤣🤣🤣 pic.twitter.com/djlvJrLaJi
“कमाई में हमारा भी हक”
इस विवाद में एक और तड़का तब लगा, जब कुछ वीडियो में कंटेंट क्रिएटर्स ने सवाल उठाया कि जब फिल्म ने ल्यारी की कहानी दिखाकर इतनी कमाई कर ली, तो क्या उस कमाई में ल्यारी के लोगों का भी हक बनता है? इस पर इलाके के लोगों ने खुलकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि फिल्ममेकर्स ने उनके इलाके की कहानी बेचकर पैसा तो कमा लिया, लेकिन न सच्चाई दिखाई, न ही इलाके की अच्छाइयों को सामने लाए। कई लोग तो यहां तक कह गए कि अगर ऐसी छवि बार-बार पेश होती रही, तो बॉलीवुड की फिल्मों पर बैन लगाने की मांग भी उठ सकती है।
This guy wants 80% of Dhurandhar's profits to be given to Lyari 🤣🤣🤣
— Sensei Kraken Zero (@YearOfTheKraken) December 22, 2025
Because apparently, Lyari is in the dumps. So if they get the money, the city will be developed.
🤣🤣 pic.twitter.com/9aEXB839s4
फिल्मी आज़ादी बनाम सामाजिक जिम्मेदारी की बहस
सबसे बड़ी बात ये है कि फिल्म में रहमान डकैत, बाबू डकैत जैसे किरदारों के जरिए ल्यारी को अपराध और हिंसा की जगह के तौर पर दिखाया गया। यही बात स्थानीय लोगों को सबसे ज्यादा चुभ रही है। उनका कहना है कि फिल्में भले ही मनोरंजन के लिए बनती हैं, लेकिन जब वो असली जगहों या समुदायों को दिखाती हैं, तो जिम्मेदारी भी बनती है। अब सवाल यही है: फिल्ममेकर्स को पूरी छूट मिलनी चाहिए या फिर असली लोगों और जगहों को दिखाते वक्त थोड़ा संतुलन जरूरी है? भारत में ‘धुरंधर’ की कमाई का जश्न चल रहा है, लेकिन पाकिस्तान के ल्यारी में ये फिल्म गुस्से और बहस की वजह बन गई है।
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