देश की सबसे अमीर नगरपालिकाओं में से एक, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC), के चुनाव अब बस कुछ ही हफ्ते दूर हैं। लेकिन महायुति के अंदर सीटों के बंटवारे पर जमकर खींचतान शुरू है। बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच बातचीत अब फाइनल राउंड में है। दोनों ही पार्टियां साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात तो कह रही हैं, मगर सच ये है कि सीटों को लेकर अब तक कोई साफ समझौता नहीं हुआ है।
65 बनाम 100
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ने शिंदे गुट को करीब 65 सीटें ऑफर की हैं। लेकिन शिंदे की टीम इसे नाकाफी मान रही है। उनका साफ कहना है अगर 100 सीटें नहीं मिलीं, तो ये डील उनके लिए इज्जत वाली नहीं होगी। इसी वजह से शिवसेना ने ये भी साफ कर दिया है कि जरूरत पड़ी तो वो अकेले चुनाव लड़ने का रास्ता खुला रखेगी। पार्टी जल्दी ही बीजेपी के सामने अपना ऑफिशियल काउंटर-प्रपोजल रखने वाली है।
2017 के चुनाव है असली झगड़े की जड़
सीटों की लड़ाई की जड़ 2017 के BMC चुनाव में है। उस वक्त एकजुट शिवसेना ने 84 सीटें जीती थीं। शिंदे गुट का तर्क है कि वो खुद को असली शिवसेना मानते हैं, इसलिए उन 84 सीटों पर उनका हक बनता है। लेकिन बीजेपी इस मांग को पूरी तरह खारिज कर चुकी है। बीजेपी का कहना है अब माहौल बदल गया है, तो पुराने आंकड़ों के हिसाब से 84 सीटें देना मुमकिन नहीं है।
वोट शेयर की बात बनी राजनीति की मजबूरी
शिंदे गुट अपनी दलील को मजबूत करने के लिए हाल के विधानसभा चुनावों के वोट शेयर का हवाला दे रहा है। उनके मुताबिक, मुंबई में बीजेपी को करीब 24% और शिंदे की शिवसेना को लगभग 20% वोट मिले। दूसरी तरफ, उद्धव ठाकरे की शिवसेना के पास 34% और एमएनएस के पास 9% वोट थे। शिंदे गुट का कहना है उनके बिना महायुति के लिए BMC जीतना आसान नहीं होगा।
कमजोर विपक्ष, संगठन पर भरोसा
शिंदे गुट को भरोसा है कि कई वार्ड्स में विपक्ष कमजोर है, और इसका पूरा फायदा उठाया जा सकता है। पार्टी का दावा है कि उनका संगठन खासकर महिलाओं और मराठी वोटर्स को साध सकता है। उन्हें लगता है कि जो वोटर उद्धव ठाकरे या एमएनएस से नाराज हैं, उन्हें भी अपनी ओर खींच सकते हैं। पार्टी के अंदरूनी आंकलन के हिसाब से, अगर उन्हें ठीक-ठाक सीटें मिलीं, तो 100 या उससे ज्यादा सीटें जीत सकते हैं।
हाल ही के चुनावों से बढ़ा शिंदे गुट का कॉन्फिडेंस
नगर परिषद और नगर पंचायत के चुनावों में शिंदे गुट ने ठीक-ठाक प्रदर्शन किया है, जिससे उनकी बारगेनिंग पावर बढ़ गई है। इन चुनावों में अच्छा स्ट्राइक रेट मिला, तो अब पार्टी लीडरशिप को भरोसा है कि शहरी निकायों में भी वो अच्छा कर सकते हैं। इसी सोच के साथ सोमवार शाम पार्टी के बड़े नेताओं की मीटिंग हुई, जिसमें बीजेपी के सामने रखा जाने वाला काउंटर-प्रपोजल फाइनल किया गया।
चुनाव है नजदीक
राज्य की 29 नगर निगमों के चुनाव के लिए मंगलवार से प्रचार रफ्तार पकड़ने वाला है। 15 जनवरी को वोटिंग, 16 जनवरी को काउंटिंग, टाइम बहुत कम है। लेकिन न महायुति में, न विपक्षी महाविकास आघाड़ी में, सीट बंटवारे की पिक्चर अभी क्लियर नहीं है। पिछले पांच-छह साल से नगर निगमों को अफसर चला रहे हैं जनता में भी बेचैनी है, और इस बार का चुनाव काफी अहम है। अब बॉल बीजेपी और शिंदे की शिवसेना के कोर्ट में है देखना है कि आखिर में दोनों साथ आते हैं या मुंबई की सियासत कोई नया मोड़ लेती है।
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