‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने पर संसद में एक खास चर्चा शुरू की गई है। सोमवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चर्चा की शुरुआत की। अब आज यानि मंगलवार को राज्यसभा में दोपहर 1 बजे से इस ऐतिहासिक गीत पर विस्तार में चर्चा होगी। आज के चर्चा की शुरुआत बीजेपी की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा इसका समापन करेंगे।
इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य ‘वंदे मातरम्’ के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद करना और आने वाली पीढ़ियों को इससे जोड़ना है। सोमवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने इसे “गौरव का क्षण” बताते हुए चर्चा की अहमियत पर प्रकाश डाला।
पीएम मोदी का संबोधन
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् पर सामूहिक चर्चा का यह अवसर भारत की लोकतांत्रिक परंपरा को और मजबूत करता है। उन्होंने इस गीत की शक्ति को याद करते हुए कहा कि यह जयघोष उन दिनों का प्रतीक है जब भारत गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की तैयारी कर रहा था। पीएम मोदी ने कहा कि यह चर्चा आने वाली पीढ़ियों को यह बताएगी कि कैसे एक गीत ने करोड़ों भारतीयों के दिलों में स्वतंत्रता की भावना जगाई। उनके अनुसार, अगर इस बहस का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह भविष्य के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।
राज्यसभा में आज 1 बजे से होगी चर्चा, अमित शाह करेंगे शुरुआत
मंगलवार को दोपहर 1 बजे से राज्यसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर विस्तृत चर्चा आयोजित की जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस बहस की शुरुआत करेंगे, जिसमें वे राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका और सांस्कृतिक विरासत पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। अमित शाह पहले भी यह कह चुके हैं कि ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ देशभक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता का सार है।
कई वरिष्ठ नेता रखेंगे अपने विचार
राज्यसभा में चर्चा का समापन भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा करेंगे। वे ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्षों की यात्रा, स्वतंत्रता संग्राम में इसके महत्व और आज के भारत में इसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार रखेंगे। इसके अलावा, राधामोहन दास अग्रवाल, के लक्ष्मण, घनश्याम तिवारी और सतपाल शर्मा जैसे वरिष्ठ नेता भी इस चर्चा में भाग लेंगे और ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों और वर्तमान परिप्रेक्ष्य पर अपने विचार साझा करेंगे। इस प्रकार, संसद में आयोजित यह चर्चा न सिर्फ भारतीय इतिहास को सलाम करती है, बल्कि देश की राष्ट्रीय चेतना को पुनर्जीवित करने का भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
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