उडुपी में अपने दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जगद्गुरु श्री श्री सुगुनेंद्र तीर्थ स्वामीजी ने विश्व गीता पर्याय – लक्ष्य कंठ गीता परायण कार्यक्रम में सम्मान किया। एक लाख से अधिक कंठों द्वारा एक स्वर में गीता श्लोकों के उच्चारण ने पूरे कार्यक्रम में अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।
‘जनसंघ और बीजेपी के सुशासन मॉडल की कर्मभूमि’
जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उडुपी उनके लिए हमेशा खास स्थान रखता है। उन्होंने याद दिलाया कि 1968 में उडुपी के लोगों ने जनसंघ के वी.एस. आचार्य को नगरपालिका परिषद में विजयी बनाया और आज जो स्वच्छता अभियान देशभर में देखा जा रहा है, उडुपी ने उसे 5 दशक पहले ही अपनाया था। यह भूमि BJP के सुशासन, संगठन और सामाजिक जागरूकता का महत्वपूर्ण केंद्र रही है।
‘एक लाख कंठों में गीता पाठ’
प्रधानमंत्री ने कहा कि सदियों से मंत्रोच्चारण की परंपरा रही है, लेकिन जब एक लाख लोग एक स्वर में गीता का पाठ करते हैं, तो एक विराट ऊर्जा का उद्भव होता है। यह मन और मस्तिष्क को नया स्पंदन देती है। सामाजिक एकता का सशक्त संदेश देती है और अध्यात्म की वास्तविक शक्ति का अनुभव कराती है। पीएम मोदी के अनुसार, यह अवसर एक विशाल ऊर्जा पिंड के अनुभव जैसा था।
सबका साथ, सबका विकास-गीता के श्लोकों से प्रेरणा
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने बताया कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ जैसी नीतियों की प्रेरणा भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों से मिलती है। उन्होंने कहा श्रीकृष्ण गरीबों की सहायता का संदेश देते हैं, जो आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं की आत्मा है। श्रीकृष्ण महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा का मार्ग दिखाते हैं, जिससे नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों को बल मिलता है। उन्होंने बताया कि उडुपी ने राम मंदिर आंदोलन में भी ऐतिहासिक योगदान दिया है।
शांति और सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री ने गीता संदेश का संदर्भ देते हुए कहा कि शांति की स्थापना के लिए अतारियों का अंत आवश्यक है। भारत श्रीकृष्ण की करुणा का संदेश भी देता है और आवश्यकता पड़ने पर ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाई में अपने संकल्प का प्रदर्शन भी करता है। भारत शांति स्थापित करना भी जानता है और उसकी रक्षा करना भी।
‘सुवर्ण तीर्थ मंतप’ का उद्घाटन
इस दौरान प्रधानमंत्री ने भगवान कृष्ण के गर्भगृह के सामने बने सुवर्ण तीर्थ मंतप का उद्घाटन किया। ऐतिहासिक कनक कवच समर्पित किया, जो उस स्थान पर स्थापित है जहां भक्त कनाकदास ने प्रथम दर्शन किए थे। यह मठ लगभग 800 साल पुराना है और इसकी स्थापना द्वैत वेदांत दर्शन के प्रवर्तक श्री मध्वाचार्य ने की थी।
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