जापान के क्यूशू द्वीप पर स्थित साकुराजिमा ज्वालामुखी में रविवार को लगातार 3 शक्तिशाली विस्फोट हुए। इन विस्फोटों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि राख और धुएं का गुबार 4.4 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया। यह पिछले 13 महीनों में दर्ज किया गया सबसे ऊंचा राख स्तंभ है।
हवाई यातायात प्रभावित
भारी राख फैलने की आशंका और सुरक्षा कारणों से कागोशिमा हवाई अड्डे पर उड़ानों पर असर पड़ा। अधिकारियों ने 30 उड़ानें रद्द कर दीं, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जापान मौसम एजेंसी की चेतावनी
JMA ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि विस्फोट से निकली राख और धुआं कागोशिमा और मियाजाकी प्रांत के कई हिस्सों में गिरेगा। लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
स्थानीय लोगों पर प्रभाव
- राख गिरने की वजह से दृश्यता कम हो सकती है।
- सड़कें और वाहन राख की परत से ढक सकते हैं
- सांस से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं इसलिए स्थानीय प्रशासन मास्क पहनने और घरों में रहने की सलाह दे रहा है।
जापान दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला वह क्षेत्र है जहां टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल सबसे ज्यादा होती है। इन्हीं प्लेटों के टकराव और दबाव के कारण जापान में भूकंप अधिक आते हैं।ज्वालामुखी गतिविधियां तेज रहती हैं। जापान में लगभग 100 से अधिक सक्रिय और निष्क्रिय ज्वालामुखी मौजूद हैं।
क्यूशू का ज्वालामुखीय इलाका
- क्यूशू द्वीप जापान का वह हिस्सा है जहां कई ज्वालामुखी स्थित हैं। इनमें से साकुराजिमा सबसे प्रसिद्ध और सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। यह कागोशिमा की खाड़ी में एक छोटे से द्वीप पर स्थित है।
- अपनी सुंदरता के कारण यह पर्यटकों को आकर्षित करता है, लेकिन विस्फोटों के दौरान सुरक्षा के लिए दूर से ही देखने की सलाह दी जाती है।
- 1914 का बड़ा विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इसने बहती लावा के जरिए इस छोटे द्वीप को जापान की मुख्य भूमि से जोड़ दिया।
फिलहाल जापान मौसम एजेंसी ज्वालामुखी की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रही है।
हाल के विस्फोटों में राख 4.4 किलोमीटर तक पहुंच गई, जो पिछले 13 महीनों में सबसे ऊंचा विस्फोट है। यदि ज्वालामुखीय गतिविधि बढ़ती है, तो और उड़ानें रद्द हो सकती हैं। आसपास के क्षेत्रों में राख गिरने की संभावना बढ़ सकती है। लेकिन फिलहाल किसी बड़े खतरे का संकेत नहीं मिला है।
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