इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ एक मामले में आज, सोमवार 17 नवंबर को फैसला सुनाने जा रहा है। इस फैसले पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। वहीं, फैसले से पहले बांग्लादेश के कई इलाकों में हिंसक घटनाएं हो रही हैं। सुरक्षा की दृष्टि से देश में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है। इसके अलावा आगजनी और हिंसा करने वालों को देखते ही गोली मारने का आदेश यूनिस सरकार ने जारी कर दिया है।
बता दें कि बांग्लादेश में अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे में उनकी पार्टी न तो चुनाव लड़ सकती है और न ही राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकती है। बांग्लादेश में हिंसक आंदोलनों के बाद शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा था। इसके बाद मोहम्मद यूनिस की सरकार बनी और फिर यूनिस समर्थकों द्वारा बड़े पैमाने पर उपद्रव किए गए। इस दौरान शेख हसीना के कई समर्थकों की हत्या कर दी गई। वहीं, वहां रहने वाले हिंदुओं को भी निशाना बनाया गया और उनके घरों को जला दिया गया।
सज़ाए मौत की मांग
गौरतलब है कि इस समय शेख हसीना भारत में निर्वासन में रह रही हैं। उनके खिलाफ जो भी सुनवाई हुई, वह उनकी गैर-मौजूदगी में संपन्न हुई। अभियोजन पक्ष ने उनके लिए मौत की सज़ा की मांग की है। फैसले से पहले शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी पार्टी पर लगा प्रतिबंध नहीं हटाया गया, तो अवामी लीग फरवरी में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों के दौरान आंदोलन करेगी, जो हिंसक भी हो सकता है।
शेख हसीना का भावुक बयान
फैसले से पहले शेख हसीना का एक भावुक बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, “गलत करने वालों को बांग्लादेश की जनता इसी धरती पर सज़ा देगी। किसी को घबराने या डरने की जरूरत नहीं है। मैं देश की जनता के साथ थी, हूं और आगे भी रहूंगी। मैं जिंदा हूं और जिंदा रहूंगी। इंशाअल्लाह, इन गुनाहगारों को बांग्लादेश की इसी जमीन पर उनकी करतूतों की सज़ा दिलाऊंगी।”
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