भारतीय वायुसेना अपनी ताकत को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। फिलहाल सेना के पास लिमिटेड संख्या में मीडियम कपीसिटी वाले विमान हैं, जिनका इस्तेमाल सैनिकों, उपकरणों और राहत सामग्री को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जाता है। अब रक्षा मंत्रालय दिसंबर तक 80 ऐसे मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी देने की तैयारी में है।
तीन देशों की कंपनियों में होगा मुकाबला
अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन अपने मशहूर C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान को पेश करेगी। ब्राजील की एम्ब्रेयर अपने आधुनिक KC-390 मिलेनियम मॉडल को भारत के लिए पेश कर रही है। वहीं, यूरोप की एयरबस डिफेंस एंड स्पेस भी A-400M विमान के साथ इस मुकाबले का हिस्सा बन सकती है। ये सभी विमान 18 से 30 टन तक का कार्गो ले जाने में सक्षम हैं।
‘मेक इन इंडिया’ से बढ़ेगी आत्मनिर्भरता
मिडिया रिपोर्टस के अनुसार, यह 40 से 80 विमानों का सौदा ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत हो रहा है, जिसका मकसद देश में रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। जो कंपनी यह टेंडर जीतती है, उसे भारत में विमानों के उत्पादन के लिए प्रोडक्शन लाइन स्थापित करनी होगी।
एम्ब्रेयर ने महिंद्रा के साथ साझेदारी करके बोली लगाई
भारतीय वायुसेना अपनी बढ़ती हवाई परिवहन जरूरतों को पूरा करने के लिए 18 से 30 टन तक कार्गो ले जा सकने वाले नए परिवहन विमानों की तलाश में है। अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के साथ मिलकर इस टेंडर में भाग लिया है। वहीं ब्राजील की एम्ब्रेयर ने महिंद्रा के साथ साझेदारी करके बोली लगाई है। एयरबस ने अभी तक अपनी आधिकारिक भागीदारी की घोषणा नहीं की है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि वह भी इस प्रतिस्पर्धा में शामिल होगी।
जानकारी के अनुसार, एयरबस टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) के साथ मिलकर वायुसेना के लिए 56 C-295 विमानों के आधुनिकीकरण पर काम कर रही है, जिसकी लागत लगभग 21,935 करोड़ रुपये है। वहीं, रक्षा क्षेत्र में एम्ब्रेयर ने भारत को अब तक वीवीआईपी उड़ानों और हवाई प्रारंभिक चेतावनी एवं नियंत्रण (AEW&C) के लिए आठ जेट विमान सप्लाई किए हैं।
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