अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पहले से ही ED, CBI और SEBI की जांच झेल रहे ग्रुप पर अब कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने भी सख्ती बढ़ा दी है। मंत्रालय ने प्रारंभिक जांच में वित्तीय गड़बड़ियों और कंपनी कानून के उल्लंघन के संकेत पाए, जिसके बाद मामले को गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) को सौंपा गया। SFIO अब रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और सीएलई प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के फंड के लेन-देन और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच करेगा। इस कदम से ग्रुप पर दबाव और बढ़ गया है।
ईडी की बड़ी कार्रवाई, 7,500 करोड़ की संपत्तियां जब्त
MCA की जांच ऐसे समय में शुरू हुई है जब ED पहले से ही रिलायंस ग्रुप पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच कर रही है। हाल ही में ED ने ग्रुप की करीब 7,500 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं, जिनमें अनिल अंबानी का मुंबई के पाली हिल स्थित पारिवारिक घर और कई व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं। यह कुर्की 31 अक्टूबर को जारी चार अस्थायी आदेशों के तहत धन शोधन रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की गई। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई ग्रुप द्वारा बैंकों से लिए गए लोन के कथित गलत इस्तेमाल से जुड़ी है।
येस बैंक लोन घोटाले से जुड़ा मामला
ईडी की जांच का मुख्य ध्यान 2017 से 2019 के बीच येस बैंक से लिए गए लोन पर है। आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसकी संबद्ध कंपनियों ने इन लोन का गलत इस्तेमाल किया। बड़ी रकम कथित तौर पर फर्जी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर की गई। अब SFIO इस मामले की जांच करेगी कि इन फंड्स का असली इस्तेमाल कहां हुआ और इसमें ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका क्या रही।
कंपनियों का दावा
बढ़ती जांच और संपत्ति जब्त होने के बावजूद, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर ने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि इन घटनाओं से उनके कामकाज, प्रदर्शन या भविष्य की योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा। कंपनियों ने शेयर बाजार में बताया कि सभी प्रोजेक्ट्स समय पर चल रहे हैं और संचालन सामान्य है।
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