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ट्रंप की धमकी काम नहीं आई, भारतीय मूल के ज़ोरान ममदानी ने सबको पछाड़ कर चुनाव जीता

न्यूयॉर्क शहर के इतिहास में एक नया पन्ना जुड़ गया है, जहाँ 34 साल के ज़ोरान ममदानी सबसे युवा मेयर बने हैं, जिनकी जीत बताती है कि लोग अब शहर में बड़ा बदलाव चाहते हैं।

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न्यूयॉर्क शहर में एक ऐसी जीत हुई है जिसने सबको चौंका दिया है। भारतीय मूल के एक युवा नेता ज़ोरान ममदानी ने मेयर का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। उनकी उम्र सिर्फ 34 साल है और वह अब न्यूयॉर्क के सबसे कम उम्र के मेयर बन गए हैं। यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि इतने बड़े शहर में इतने ज्यादा लोग वोट डालने आए कि पिछले 56 सालों का रिकॉर्ड टूट गया लोग सुबह से लेकर रात तक लंबी लाइनों में खड़े रहे ताकि वे अपनी पसंद का नेता चुन सकें और शहर की महंगाई जैसी बड़ी समस्याओं का हल ढूंढ सकें।

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ट्रंप के कड़े विरोध के बावजूद ममदानी की बड़ी जीत

इस चुनाव से पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ज़ोरान ममदानी का खुलकर विरोध किया था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया था कि वे एंड्रयू कुओमो को पूरा समर्थन दे रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि ममदानी शहर के लिए खतरा हैं और अगर वह जीते तो शहर बर्बाद हो जाएगा। ट्रंप ने लोगों से कहा कि कुओमो को ही वोट दें, नहीं तो पछताना पड़ेगा। लेकिन न्यूयॉर्क के लोगों ने ट्रंप की बातों पर ध्यान नहीं दिया और वे ज़ोरान के पक्ष में डटकर खड़े रहे। ज़ोरान ने प्रचार के दौरान लोगों को शांत तरीके से समझाया कि वह महंगाई कम करेंगे और हर किसी के लिए जीवन आसान बनाएंगे। ट्रंप की सारी कोशिशें बेकार गईं और ज़ोरान की जीत ने सबको हैरान कर दिया।

तीन बड़े उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला

मेयर के इस चुनाव में तीन बड़े उम्मीदवार मैदान में थे, जिनके विचार एक दूसरे से बिल्कुल अलग थे। डेमोक्रेटिक पार्टी से ज़ोरान ममदानी ने अपने प्रचार में इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया कि शहर में मकान का किराया बहुत ज्यादा है और बस का किराया पूरी तरह से मुफ्त होना चाहिए। निर्दलीय उम्मीदवार एंड्रयू कुओमो पहले गवर्नर रह चुके थे और उन्होंने अपने अनुभव का हवाला देकर वोट मांगे। वह लगातार कहते थे कि मैंने पहले भी बड़े-बड़े काम किए हैं इसलिए मुझे एक और मौका मिलना चाहिए। रिपब्लिकन पार्टी से कर्टिस स्लीवा ने शहर में अपराध रोकने को अपना मुख्य मुद्दा बनाया और वे लाल टोपी पहनकर घूमते रहे। तीनों ने ही दिन रात मेहनत की, लेकिन आखिर में ज़ोरान ममदानी ने सबसे ज्यादा वोट हासिल करके जीत अपने नाम कर ली। शहर के चुनाव बोर्ड ने बताया कि 1969 के बाद यह पहला मौका है जब इतने ज्यादा वोट पड़े हैं।

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युवा समर्थकों और नई सोच की ताकत

ज़ोरान ममदानी को सबसे ज्यादा समर्थन युवाओं से मिला, जो न्यूयॉर्क में रहते हैं और रोज बढ़ती महंगाई से परेशान हैं। उनके प्रमुख वादों में बस को मुफ्त करना, बच्चों की देखभाल मुफ्त करना और अमीर लोगों पर टैक्स बढ़ाना शामिल था ताकि गरीब लोगों को इसका सीधा फायदा मिल सके। बर्नी सैंडर्स और एलेक्जेंड्रिया जैसे बड़े नेता उनके समर्थन में प्रचार करने आए थे। ज़ोरान ने शहर की मस्जिदों में जाकर लोगों से बात की और उर्दू और बांग्ला भाषा में फोन करके वोट मांगे। उनका यह तरीका कामयाब रहा और शहर के अलग-अलग समुदायों से उन्हें बड़ी संख्या में वोट मिले। यह जीत दिखाती है कि अब लोग पुराने नेताओं से ऊब चुके हैं और वे नई सोच वाले नेता को मौका देना चाहते हैं। ज़ोरान अब शहर के पहले मुस्लिम मेयर बन गए हैं, जिनकी जीत से शहर में नई उम्मीद जगी है।

Keywords: Zohran Mamdani New York Mayor, Youngest NYC Mayor, Indian-Uganda Muslim Mayor, New York Election Upset

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