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बॉलीवुड की इस अभिनेत्री ने 17 साल की उम्र में जीता बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड, एक ऐसी कहानी जिसने पूरे बॉलीवुड को चौंका दिया

सिर्फ 17 साल की उम्र में फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस बनने वाली पद्मिनी कोल्हापुरे ने अपनी मासूमियत और बेहतरीन अदाकारी से 80 के दशक में बॉलीवुड को हिला दिया था।

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जब भी हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर की बात होती है, तो 80 के दशक की कुछ अदाकारा आज भी दर्शकों के दिलों में बसती हैं। उन्हीं में से एक हैं पद्मिनी कोल्हापुरे, जिनकी मुस्कान, गहरी आंखें और बेहतरीन अभिनय ने उन्हें अपने समय की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में शामिल किया। बेहद कम उम्र में उन्होंने वो मुकाम हासिल किया, जहां पहुंचने में कई कलाकारों को सालों लगते हैं।

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संगीत से भरा था बचपन

पद्मिनी कोल्हापुरे का जन्म 1 नवंबर 1965 को मुंबई के एक मराठी परिवार में हुआ। उनके पिता पंढरीनाथ कोल्हापुरे प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और वीणा वादक थे। घर का माहौल पूरी तरह संगीतमय था, इसलिए पद्मिनी ने भी छोटी उम्र से ही संगीत की शिक्षा लेना शुरू कर दिया। अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने गायकी में भी अपनी पहचान बनाई।

बचपन में ही वे कई फिल्मों में कोरस सिंगर के रूप में गा चुकी थीं। अपनी बहन शिवांगी कोल्हापुरे जो आगे चलकर शक्ति कपूर की पत्नी बनी के साथ उन्होंने ‘यादों की बारात’ और ‘किताब’ जैसी फिल्मों में अपनी आवाज दी। इस प्रकार कला उनके खून में रची-बसी थी।

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बाल कलाकार के रूप में शुरुआत

सिर्फ 10 साल की उम्र में पद्मिनी ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। उनकी पहली फिल्म थी देवानंद की ‘इश्क इश्क इश्क’। इस फिल्म के बाद वे ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ में नजर आईं, जिसमें उन्होंने जीनत अमान के बचपन का रोल निभाया। यह किरदार उनके करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुआ और दर्शकों का ध्यान उन पर गया। इसके बाद उन्होंने ‘इंसाफ का तराजू’, ‘थोड़ी सी बेवफाई’ और ‘साजन बिना ससुराल’ जैसी फिल्मों में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया। अपने हर किरदार में उन्होंने गहराई और सच्चाई दिखाई, जिससे निर्माता-निर्देशकों की नजर उन पर टिक गई।

लीड हीरोइन बनने की राह

साल 1980 में आई फिल्म ‘इंसाफ का तराजू’ ने उनके करियर को नई दिशा दी। फिल्म में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस अवॉर्ड मिला। इसके बाद उन्हें एक के बाद एक बड़ी फिल्मों के ऑफर आने लगे।

साल 1981 में राज कपूर ने उन्हें अपनी फिल्म ‘प्रेम रोग’ में बतौर लीड एक्ट्रेस साइन किया। यही फिल्म उनके जीवन का असली टर्निंग पॉइंट बनी।

‘प्रेम रोग’ की कहानी एक ऐसी लड़की की थी, जो शादी के अगले ही दिन विधवा हो जाती है और फिर समाज के ताने-बाने से जूझती है। इस फिल्म में पद्मिनी ने अपने अभिनय से दर्शकों को रुला दिया। उन्होंने उस किरदार की पीड़ा, शर्म और साहस को इतनी सच्चाई से जिया कि हर दर्शक उनसे जुड़ गया।

फिल्म में उनके अपोजिट ऋषि कपूर थे और दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री बेहद पसंद की गई। इस फिल्म के लिए 17 साल की पद्मिनी कोल्हापुरे को फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड मिला इतनी कम उम्र में यह सम्मान पाने वाली वे हिंदी सिनेमा की सबसे युवा एक्ट्रेस बनी।

सफलता की उड़ान

‘प्रेम रोग’ की सफलता के बाद पद्मिनी 80 के दशक की सबसे व्यस्त और चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। उन्होंने ‘प्यार झुकता नहीं’, ‘विधाता’, ‘वो सात दिन’, ‘आहिस्ता-आहिस्ता’, और ‘स्वर्ग से सुंदर’ जैसी फिल्मों में यादगार प्रदर्शन किया। मिथुन चक्रवर्ती, जितेंद्र, ऋषि कपूर, और राजेश खन्ना जैसे सुपरस्टार्स के साथ उनकी जोड़ी खूब पसंद की गई।

प्यार और साहस की कहानी

फिल्म ‘ऐसा प्यार कहां’ (1986) के सेट पर पद्मिनी की मुलाकात निर्माता प्रदीप शर्मा से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया। लेकिन जब परिवार ने इस रिश्ते को मंजूरी नहीं दी, तो पद्मिनी ने हिम्मत दिखाते हुए घर से भागकर शादी कर ली। शादी के बाद भी उन्होंने फिल्मों में काम जारी रखा और अपनी पहचान बनाए रखी। पद्मिनी और प्रदीप शर्मा का एक बेटा है प्रियांक शर्मा, जो अब खुद भी एक्टर बन चुके हैं।

मर्यादा और आत्मसम्मान की मिसाल

पद्मिनी कोल्हापुरे अपनी सादगी और मर्यादित छवि के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कभी भी बोल्ड या अशोभनीय दृश्यों को स्वीकार नहीं किया। ‘प्रेम रोग’ के दौरान जब राज कपूर ने उनसे एक किसिंग सीन करने को कहा, तो उन्होंने साफ मना कर दिया था। इसके बावजूद फिल्म ब्लॉकबस्टर रही और उनके अभिनय को सराहा गया।

आज भी कायम है उनकी पहचान

भले ही अब पद्मिनी कोल्हापुरे फिल्मों में कम नजर आती हैं, लेकिन उनकी लोकप्रियता कम नहीं हुई। वह आज भी सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं और अपने पुराने साथियों व नई पीढ़ी के कलाकारों के साथ जुड़ी रहती हैं।पद्मिनी सिर्फ एक एक्ट्रेस नहीं, बल्कि उस दौर की मिसाल हैं जब प्रतिभा और आत्मसम्मान दोनों को साथ लेकर चलना मुश्किल था। उन्होंने साबित किया कि उम्र नहीं, मेहनत और सच्चाई ही सफलता की असली कुंजी है।

Keywords: Padmini Kolhapure, Best Actress, Prem Rog, Bollywood 80s

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