नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में देश-विदेश से आए विद्वानों, संतों और समाजसेवकों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का उद्देश्य “वेदों पर आधारित मानवता, सत्य और एकता का प्रसार रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आर्य समाज ने भारत में सामाजिक सुधार, शिक्षा, नारी सशक्तिकरण और स्वराज आंदोलन को नई दिशा दी है। उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती की शिक्षाओं को भारत के ‘आध्यात्मिक आत्मनिर्भरता’ का आधार बताया। PM मोदी ने यह भी कहा कि आज जब भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है, तब वेदों की सार्वभौमिक शिक्षाएँ दुनिया के लिए प्रेरणा बन रही हैं। इस महासम्मेलन में विभिन्न देशों के वैदिक विद्वानों ने वेदों और आधुनिक विज्ञान के बीच तालमेल पर अपने विचार रखे। विशेष सत्रों में योग, आयुर्वेद, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा सुधार और नैतिक मूल्यों पर भी चर्चा हुई।
आर्य समाज की भूमिका
आर्य समाज ने सदियों से सामाजिक समानता, शिक्षा के प्रसार और कुप्रथाओं के विरोध में अग्रणी भूमिका निभाई है। महर्षि दयानंद सरस्वती के “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” (पूरे विश्व को आर्य बनाओ) के सिद्धांत पर आधारित यह आंदोलन आज वैश्विक रूप ले चुका है। अपने समापन भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का भविष्य तभी उज्जवल होगा जब हम अपनी जड़ों से जुड़ेंगे और वेदों की शिक्षाओं को आधुनिक जीवन में उतारेंगे। आर्य समाज का आदर्श-सत्य, तप और सेवा आज के भारत की आत्मा है।
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