- Advertisement -

फौलादी इरादों वाले सरदार पटेल… भारत के ‘लौह पुरुष’ और राष्ट्र के निर्माता की जयंती पर जानें उनका अखंड योगदान

'भारत का लौह पुरुष' और आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है। उनकी जयंती (31 अक्टूबर) को हर साल राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

4 Min Read

भारत के इतिहास में कुछ ही व्यक्तित्व ऐसे हुए हैं जिनकी दृढ़ता ने देश की दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया। सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण शख्सियतों में से एक हैं। उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ और आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है। उनकी जयंती (31 अक्टूबर) को हर साल राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो हमें अखंड भारत के निर्माण में उनके अभूतपूर्व योगदान की याद दिलाता है। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी निर्णायक भूमिका से लेकर, 560 से अधिक रियासतों को भारतीय संघ में विलय करने तक, उनका योगदान अद्वितीय है। आज हम जो भारत देखते हैं, वह उनके लौह-संकल्प की झलक है।

- Advertisement -
Ad image

सरदार पटेल का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को गुजरात के नाडियाड में एक किसान परिवार में हुआ था। विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की।

स्वयं अध्ययन: प्रारंभिक शिक्षा के बाद, उन्होंने अक्सर उधार की किताबों से खुद अध्ययन किया और कानून की परीक्षा (बार की परीक्षा) उत्तीर्ण की।

- Advertisement -
Ad image

कुशल वकील: गोधरा, बोरसाद और आनंद में एक प्रखर और कुशल वकील के रूप में ख्याति अर्जित की।

इंग्लैंड यात्रा: 36 वर्ष की आयु में, वह लंदन के मिडिल टेम्पल इन में कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए और बिना किसी पूर्व कॉलेज पृष्ठभूमि के, 36 महीने का कोर्स 30 महीनों में पूरा कर अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

भारत लौटने पर, उन्होंने ब्रिटिश सरकार की आकर्षक नौकरी का प्रस्ताव ठुकरा दिया और अहमदाबाद में सफल बैरिस्टर के रूप में अभ्यास शुरू किया।

राजनीतिक जीवन: गांधीजी का अनुसरण और संघर्ष

महात्मा गांधी के निर्भीक नेतृत्व से प्रभावित होकर, सरदार पटेल ने अपनी वकालत छोड़ दी और पूरी तरह से स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित हो गए।

अहमदाबाद नगरपालिका अध्यक्ष: 1924 से 1928 तक नगरपालिका समिति के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने जल आपूर्ति, स्वच्छता और नगर नियोजन में सुधार किया।

खेड़ा सत्याग्रह (1918): महात्मा गांधी के साथ मिलकर भू-राजस्व भुगतान से छूट दिलाने के लिए इस गहन अभियान का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया।

बारडोली सत्याग्रह (1928): सरकार द्वारा अत्यधिक भू-राजस्व वृद्धि के खिलाफ उन्होंने किसानों का नेतृत्व किया। इस संघर्ष की सफलता ने उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि प्रदान की, जो उन्हें महात्मा गांधी द्वारा दी गई थी।

रियासतों का एकीकरण: ‘लौह पुरुष’ की सबसे बड़ी विरासत

आजादी के बाद, भारत के प्रथम गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री के रूप में सरदार पटेल को 565 रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करने का विशाल मिशन सौंपा गया।

कूटनीति और दृढ़ता: त्रावणकोर, भोपाल, कश्मीर और विशेष रूप से जूनागढ़ तथा हैदराबाद जैसी रियासतें, जो विलय का विरोध कर रही थीं, उन्हें पटेल ने साम, दाम, दंड और भेद (कूटनीति, मध्यस्थता, और बल प्रयोग) का प्रयोग करके अधीन किया।

अखंडता की गारंटी: उनके अथक प्रयासों और राजनेता कौशल के कारण ही भारत का विखंडन रुका और देश ने एक मजबूत राष्ट्र के रूप में आकार लिया।

भारत रत्न: राष्ट्र निर्माण में इस विशाल योगदान के लिए, उन्हें उनकी मृत्यु के 41 वर्ष बाद, 1991 में ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।

एकता की महानतम श्रद्धांजलि

सरदार पटेल की विरासत को अमर बनाने के लिए, गुजरात में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का निर्माण किया गया है, जो उनकी अखंड भारत की कल्पना और राष्ट्रीय एकता के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है।

सरदार पटेल का जीवन हमें सिखाता है कि अटल इच्छाशक्ति, अनुशासन और राष्ट्र सेवा किसी भी चुनौती का सामना करने की कुंजी है।

Keywords: Sardar Vallabhbhai Patel Jivani, Iron Man Of India, Statue Of Unity, Integration Of Princely States, National Unity Day

Share This Article
कोई टिप्पणी नहीं

- Advertisement -

- Advertisement -

- Advertisement -

लेटेस्ट
चुटकी शॉट्स
वीडियो
वेबस्टोरी
मेन्यू