90 के दशक का दौर बॉलीवुड संगीत के लिए स्वर्ण युग माना जाता है। आनंद,मिलिंद, नदीम श्रवण, जतिन,ललित जैसे संगीतकारों की धुनें और कुमार सानू, अलका याग्निक, सोनू निगम जैसी आवाज़ें मिलकर वो जादू रचती थी, जो आज भी बरकरार है। इन्हीं सुनहरे सालों में एक ऐसा गीत बना जो आज भी पार्टी और शादी समारोहों में गूंजता है , ‘अंखियों से गोली मारे’। लेकिन इस गाने की शुरुआत एक बेहद दिलचस्प अंदाज़ में हुई थी गुलशन कुमार के बेडरूम में।
गुलशन कुमार ने गुनगुनाई भोजपुरी धुन
गीतकार समीर अनजान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि 1997 की एक शाम गुलशन कुमार ने उन्हें अपने घर बुलाया था। बातचीत के बीच गुलशन कुमार ने मुस्कुराते हुए कहा, “कुछ मस्ती भरा गाना चाहिए, जो गोविंदा, रवीना की जोड़ी पर फिट बैठे।” और फिर उन्होंने धीमे-धीमे एक भोजपुरी लोकगीत गुनगुनाना शुरू किया “जब से सिपाही से भइले हवलदार, नथुनिया से गोली मारे सइयां हमार…”बस, यही वह पल था जब समीर के मन में एक चिंगारी जल उठी। गुलशन कुमार ने कहा, “इससे कुछ जादुई बनाओ।” और समीर ने उसी लाइन को आधार बनाकर ‘अंखियों से गोली मारे’ जैसी हिट हुक लाइन गढ़ दी।
रातभर में तैयार हुआ गीत
समीर ने म्यूज़िक डायरेक्टर जोड़ी आनंद,मिलिंद के साथ रातभर काम किया। गाने में रोमांस और जोश का ऐसा संतुलन बनाया गया कि सुनते ही पैर थिरकने लगें। जब “अंखियों से गोली मारे” की हुक लाइन तय हुई, समीर को यकीन था कि यह गाना हिट साबित होगा और हुआ भी ऐसा ही। दिलचस्प बात यह है कि यह गाना पहले अल्ताफ राजा को ऑफर किया गया था। लेकिन जब उनकी टीम ने 1 लाख रुपये फीस मांगी, तो मेकर्स ने सोनू निगम को चुना। सोनू ने अपने अंदाज़ में गाना गाया और रिलीज़ से पहले ही यह चार्टबस्टर बन गया। बाद में, कहा जाता है कि अल्ताफ राजा को इस फैसले का पछतावा हुआ।
‘दूल्हे राजा’ बनी ब्लॉकबस्टर
1998 में रिलीज़ हुई ‘दूल्हे राजा’ में गोविंदा और रवीना टंडन की जोड़ी ने इस गाने पर ऐसा धमाल मचाया कि यह फिल्म की जान बन गया। हरमेश मल्होत्रा के निर्देशन और गुलशन कुमार की टी-सीरीज़ के संगीत से सजी इस फिल्म ने 5 करोड़ के बजट में करीब 22 करोड़ की कमाई की थी। वक्त बदला, म्यूज़िक स्टाइल बदले, पर इस गाने की पॉपुलैरिटी कभी कम नहीं हुई। समीर अनजान, जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सबसे सफल बॉलीवुड गीतकार के रूप में दर्ज हैं, ने एक लोकगीत से प्रेरणा लेकर ऐसा शानदार गीत रचा जो आज भी पीढ़ियों को जोड़ता है। सच तो यह है कि कभी-कभी बेडरूम में गुनगुनाई गई एक पंक्ति, पूरी पीढ़ी की याद बन जाती है।
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