मुंबई के वकील हितेंद्र गांधी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में याचिका दायर कर देशभर में कार्बाइड गन और असुरक्षित पटाखों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दिवाली जैसे त्योहारों के बाद हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है, जिससे लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण के अधिकार प्रभावित होते हैं।
दिवाली के दौरान AQI गंभीर स्तर तक
याचिका में बताया गया है कि दिवाली के दौरान और बाद में PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषक कई गुना बढ़ जाते हैं और AQI ‘बहुत खराब’ से लेकर ‘गंभीर’ स्तर तक पहुंच जाता है। कोर्ट के आदेश और ‘ग्रीन क्रैकर्स’ नीति के बावजूद प्रदूषण में पर्याप्त कमी नहीं आई है, क्योंकि बाजार में बड़ी मात्रा में गैर-मानक और अवैध पटाखे बिक रहे हैं।
देश में 130 से अधिक घायल
हितेंद्र गांधी ने अपनी याचिका में यह भी बताया कि कार्बाइड गन जैसे विस्फोटक उपकरणों के इस्तेमाल से देश के कई हिस्सों में 130 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। ये पटाखे बिना किसी सुरक्षा मानक के बनाए जाते हैं और बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं।
मानवाधिकारों का भी गंभीर उल्लंघन
उन्होंने कहा कि यह केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि मानवाधिकारों का भी गंभीर उल्लंघन है, क्योंकि इससे शारीरिक चोटें, बच्चों के लिए खतरा और प्रशासनिक लापरवाही जैसी समस्याएं सामने आती हैं। पशु संगठनों ने भी रिपोर्ट दी है कि दिवाली के बाद कई पालतू और आवारा जानवर घायल या भयभीत हो जाते हैं।
याचिका में NHRC से मांग की गई है कि वह देशभर में इस विषय पर अध्ययन करे, लोगों को जागरूक करे और कार्बाइड पटाखों पर सख्त रोक लगाए। साथ ही, दिवाली के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को सुरक्षित रखते हुए पर्यावरण-अनुकूल तरीके से उत्सव मनाने के उपाय सुझाए जाएं।
हितेंद्र गांधी ने कहा कि उनका उद्देश्य त्योहार की खुशियों को कम करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि दिवाली सुरक्षित, स्वच्छ और खुशहाल हो, सभी के लिए।
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