AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार विधानसभा चुनाव में वोटर सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को एक बड़ा मुद्दा बताया है। उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया को जल्दबाजी में किया गया है और साथ ही चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाए। ओवैसी ने साफ कहा कि नागरिकता की जांच गृह मंत्रालय का काम है, चुनाव आयोग का नहीं।
एक इंटरव्यू में ओवैसी ने कहा कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं अगर उनकी जांच सही से नहीं की गई तो मतदान के दिन हंगामा हो सकता है। उन्होंने बताया कि AIMIM के बिहार इकाई के प्रमुख अख्तरुल ईमान सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर अपील कर चुके हैं। बिहार में चुनाव 2 चरणों में 6 और 11 नवंबर को होंगे, जबकि वोटों की गिनती 14 नवंबर को की जाएगी। चुनाव आयोग ने SIR के पूरा होने के बाद ही चुनाव की तारीखों का ऐलान किया।
ओवैसी ने बताया कि प्रारूपित मतदाता सूची में पहले 65 लाख नाम हटा दिए गए थे, और चुनाव आयोग ने हाल ही में अतिरिक्त 3.5 लाख नाम हटाए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार एक बड़ा राज्य है और यहाँ की ग्रामीण आबादी बहुत बड़ी है। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग ने इतनी जल्दी क्यों किया, जबकि जून में ही SIR की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की गई थी।
ओवैसी ने कहा, SIR एक बड़ा मुद्दा है। हमारी पार्टी के अध्यक्ष अख्तरुल ईमान सुप्रीम कोर्ट गए हैं। जिनके नाम हटाए गए हैं अगर उनकी जांच नहीं होगी तो मतदान के दिन फिर से हंगामा होगा। 6.5 लाख नाम पहले हटाए गए थे, अब 3.5 लाख और नाम हटाए गए हैं, ये सभी की फिर से जांच होनी चाहिए। इतनी जल्दी क्या थी? थोड़ा समय लिया जा सकता था।
उन्होंने बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) पर पड़े दबाव की भी बात कही और अधिसूचना के उस हिस्से की आलोचना की जिसमें कहा गया कि यदि किसी मतदाता को 2-3 बार घर पर नहीं पाया गया तो ERO को इसकी सूचना देनी होगी, जो विदेशी नागरिकता अधिनियम के तहत कार्रवाई का कारण बन सकता है। ओवैसी ने कहा कि चुनाव आयोग का यह काम नहीं है, यह गृह मंत्रालय का कार्य है।
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