उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत का डेरा इस्माइल खान जिला शुक्रवार देर रात जोरदार धमाके से हिल गया। रत्ता कुलाची पुलिस ट्रेनिंग स्कूल के मुख्य द्वार पर विस्फोटकों से लदा ट्रक टकराया और उसके साथ ही पूरे इलाके में दहशत फैल गई। चंद सेकंडों में धमाके की आवाज पूरे शहर में गूंज उठी। धमाके के बाद हथियारों से लैस आतंकवादी वर्दी पहनकर परिसर में घुस आए और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। ट्रेनिंग सेंटर में उस समय करीब 200 से ज्यादा रंगरूट और कर्मचारी मौजूद थे, जिन्हें तुरंत सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।
पुलिस और आतंकियों के बीच पांच घंटे तक चली भीषण मुठभेड़
हमले के तुरंत बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। शुरुआती मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए, जबकि बाकी आतंकी इमारतों में छिप गए। इसके बाद ऑपरेशन को तेज करते हुए एसएसजी कमांडो, अल-बुर्क फोर्स, एलीट फोर्स और स्थानीय पुलिस ने मोर्चा संभाला। डीपीओ साहिबजादा सज्जाद अहमद और आरपीओ सैयद अशफाक अनवर ने खुद मौके पर अभियान की कमान संभाली। पांच घंटे तक चली इस मुठभेड़ में आतंकियों ने लगातार हथगोले और गोलियां दागीं, लेकिन सुरक्षाबलों ने एक-एक कर सभी छह आतंकवादियों को मार गिराया। हालांकि, इस साहसी अभियान में सात पुलिसकर्मियों ने अपनी जान गंवाई और 13 जवान गंभीर रूप से घायल हुए।
आतंकियों के पास से मिले विस्फोटक और आधुनिक हथियार
ऑपरेशन खत्म होने के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की तलाशी ली और आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और सुसाइडल जैकेट बरामद किए। इससे साफ है कि यह हमला बेहद सुनियोजित था। शुरुआती जांच में पता चला कि आतंकवादी पुलिस ट्रेनिंग सेंटर को पूरी तरह तबाह करने की योजना लेकर आए थे। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, हमले का तरीका हाल के वर्षों में हुए अफगान सीमा पार के आतंकी हमलों जैसा था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के पीछे किसी बड़े आतंकी संगठन का हाथ हो सकता है।
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