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30% कम प्रदूषण वाले ग्रीन पटाखे क्या हैं? जानें क्यों दिल्ली इन्हें जलाना चाहती है!

दिल्ली सरकार की सुप्रीम कोर्ट में बड़ी अपील: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि त्योहार करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है, इसलिए दिवाली पर ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की छूट मिले।

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दिवाली का त्योहार रोशनी और खुशियों का मौका होता है, लेकिन दिल्ली में हवा के प्रदूषण की वजह से सालों से पटाखों पर सख्त पाबंदी लगी हुई है, जो फैंस को थोड़ा मायूस करता है। 11 अक्टूबर 2025 को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की कि दिवाली पर ग्रीन पटाखों को जलाने की इजाजत दी जाए, क्योंकि ये पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाते हैं और करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर को ग्रीन पटाखों के बनाने की छूट दी थी, लेकिन उनकी बिक्री और इस्तेमाल पर अभी रोक बरकरार है। अप्रैल 2025 के आदेश से दिल्ली-एनसीआर में पूरे साल पटाखों पर पूरी तरह बैन है।

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दिल्ली में पटाखों पर क्यों है सख्ती

दिल्ली में हर साल दिवाली के समय हवा की क्वालिटी इतनी खराब हो जाती है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है और सांस की बीमारियां बढ़ जाती हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 2017 से पटाखों पर कुछ पाबंदियां लगाई थीं, और सुप्रीम कोर्ट ने इसे और सख्त कर दिया। 2019 से दिल्ली में सभी तरह के पटाखों पर रोक है, जिसमें ग्रीन पटाखे भी शामिल हैं। 2023 में कोर्ट ने राज्यों को ग्रीन पटाखों की इजाजत देने की बात कही थी, लेकिन पुरानी सरकार ने प्रदूषण के डर से पूर्ण बैन रखा। रेखा गुप्ता की सरकार का कहना है कि ग्रीन पटाखे कम नुकसान करते हैं, इसलिए लोगों को त्योहार मनाने का हक मिलना चाहिए।

ग्रीन पटाखे कैसे बचाते हैं हवा

ग्रीन पटाखों को 2018 में सीएसआईआर-एनईईआरआई ने बनाया था, जो सामान्य पटाखों से 30 फीसदी कम धूल और शोर पैदा करते हैं, जिससे हवा और कान दोनों को राहत मिलती है। इनमें बेरियम नाइट्रेट जैसे जहरीले रसायन नहीं होते, और खास योजक डाले जाते हैं जो जलने पर जलवाष्प छोड़ते हैं। इनका शोर 110 से 125 डेसिबल तक रहता है, जबकि सामान्य पटाखे 160 डेसिबल तक जाते हैं। इन्हें पहचानने के लिए पैकेजिंग पर ग्रीन लोगो, क्यूआर कोड और एनईईआरआई व पीईएसओ का सर्टिफिकेट होता है। ये केवल लाइसेंस वाली फैक्टरियों में बनते हैं।

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ग्रीन पटाखों की तीन खास किस्में

एनईईआरआई के मुताबिक ग्रीन पटाखे तीन तरह के होते हैं, जो हवा को अलग-अलग तरीके से कम प्रदूषित करते हैं। पहला है सेफ वॉटर रिलीजर्स, जो जलते समय पानी बनाते हैं और सल्फर-नाइट्रोजन जैसी गैसें उसमें घोल लेते हैं। दूसरा है स्टार क्रैकर्स, जो कम सल्फर और एल्यूमिनियम इस्तेमाल करते हैं। तीसरा है अरोमा क्रैकर्स, जो कम प्रदूषण के साथ खुशबू फैलाते हैं। ये दिखने में सामान्य पटाखों जैसे ही हैं, लेकिन हवा में कम जहरीली गैस छोड़ते हैं। दिल्ली सरकार का कहना है कि समयबद्ध इस्तेमाल से लोग त्योहार का मजा ले सकते हैं और हवा को भी कम नुकसान होगा।

Keywords: Green Firecrackers Delhi Ban, Diwali Pollution Control Measures, Rekha Gupta Supreme Court Plea, CSIR-NEERI Green Crackers Technology, Safe Festive Celebrations 2025

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