नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने शुक्रवार को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को देने का ऐलान किया। मचाडो को यह पुरस्कार उनके लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष के लिए मिला है। उन्होंने वेनेजुएला में अधिनायकवादी शासन के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों को लोकतांत्रिक बदलाव के लिए प्रेरित किया। नोबेल कमेटी ने कहा कि मचाडो का काम शांति और मानवाधिकारों के लिए एक साहसी कदम है, खासकर उस देश में जहां सरकार असहमतियों को दबाने की कोशिश करती रही है।
कौन हैं मारिया कोरिना मचाडो?
मारिया कोरिना मचाडो का जन्म 7 अक्टूबर 1967 को वेनेजुएला में हुआ था। वह एक औद्योगिक इंजीनियर और राजनीतिक सुधार की मुखर आवाज हैं। उन्होंने 2002 में ‘सूमाते’ (Súmate) नामक संगठन की स्थापना की थी, जो चुनावों की पारदर्शिता और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देता है। मचाडो 2011 से 2014 तक वेनेजुएला की नेशनल असेंबली की सदस्य रहीं और बाद में ‘वेंटे वेनेजुएला’ (Vente Venezuela) पार्टी की राष्ट्रीय समन्वयक बनीं। 2018 में उन्हें बीबीसी की 100 प्रभावशाली महिलाओं में शामिल किया गया था और 2025 में टाइम मैगज़ीन ने उन्हें 100 प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में जगह दी। मचाडो पर मादुरो सरकार ने देश छोड़ने पर प्रतिबंध लगाया था, बावजूद इसके उन्होंने विपक्ष का नेतृत्व करते हुए 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में प्राथमिक जीत हासिल की थी।
In the past year, #NobelPeacePrize laureate Maria Corina Machado has been forced to live in hiding. Despite serious threats against her life she has remained in the country, a choice that has inspired millions of people.
— The Nobel Prize (@NobelPrize) October 10, 2025
When authoritarians seize power, it is crucial to… pic.twitter.com/GA3C7asz4Y
ट्रंप की उम्मीदों पर लगा विराम
इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी चर्चा में रहे। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कुछ शांति समझौतों को अपनी उपलब्धि बताते हुए यह पुरस्कार पाने की उम्मीद जताई थी। लेकिन विशेषज्ञों का कहना था कि नोबेल कमेटी आमतौर पर ऐसे व्यक्तियों या संगठनों को चुनती है जो वर्षों से शांति और मानवता की सेवा में जुटे हों। ट्रंप की उम्मीदों के विपरीत, मचाडो का चयन यह दर्शाता है कि यह पुरस्कार केवल राजनीतिक प्रभाव से नहीं, बल्कि सामाजिक योगदान और नैतिक साहस के आधार पर दिया जाता है।
नोबेल शांति पुरस्कार का महत्त्व
नोबेल शांति पुरस्कार की शुरुआत 1901 में हुई थी और इसे उन लोगों या संस्थाओं को दिया जाता है जो अंतरराष्ट्रीय शांति, भाईचारे और मानवाधिकारों को बढ़ावा देते हैं। बाकी नोबेल पुरस्कार (भौतिकी, रसायन, चिकित्सा और साहित्य) स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में दिए जाते हैं, जबकि शांति पुरस्कार का ऐलान और समारोह नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में होता है। पिछले वर्ष 2024 का यह सम्मान जापान की संस्था निहोन हिदानक्यो को मिला था, जो परमाणु हथियारों के विरोध में दशकों से कार्यरत है। इस बार मचाडो का चयन न केवल वेनेजुएला की जनता के संघर्ष को सम्मान देता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि शांति केवल युद्ध रोकने से नहीं, बल्कि लोगो के अधिकारों की रक्षा से भी संभव है।
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