पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और रावलपिंडी में शुक्रवार को मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं अचानक बंद हो गईं, जिससे लोग परेशान हो गए और रोजमर्रा का काम रुक गया क्योंकि तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान यानी TLP ने फिलिस्तीन के समर्थन में ‘लब्बैक या अक्सा मिलियन मार्च’ बुलाया था। शहबाज शरीफ की सरकार को डर था कि यह प्रदर्शन हिंसा में बदल सकता है, इसलिए पाकिस्तान टेलीकॉम्युनिकेशन अथॉरिटी को रात 12 बजे से इंटरनेट बंद करने का आदेश दिया गया। शहरों के मुख्य रास्तों पर कंटेनर लगाकर सड़कें सील कर दी गईं ताकि प्रदर्शनकारी राजधानी न पहुंच सकें। TLP के लाखों समर्थक हैं, और पहले भी इसके प्रदर्शनों ने सरकार को मुश्किल में डाला है।
लाहौर में हिंसा, TLP चीफ की गिरफ्तारी ने मचाया हंगामा
गुरुवार रात को पंजाब पुलिस ने TLP के सरगना साद हुसैन रिजवी को लाहौर के यतीम खाना स्थित पार्टी मुख्यालय से गिरफ्तार किया, जिसके बाद कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर पत्थर और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। झड़पों में पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए, जबकि TLP का दावा है कि उनका एक कार्यकर्ता मारा गया। सड़कें जाम हो गईं, और पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी। TLP का कहना है कि मरियम नवाज की सरकार फिलिस्तीन समर्थन को दबा रही है।
इस्लामाबाद में सख्ती, सेक्शन 144 लागू
इस्लामाबाद के रेड जोन को सील कर दिया गया, जहां सिर्फ अधिकृत लोग ही जा सकते हैं। रावलपिंडी में सेक्शन 144 11 अक्टूबर तक लागू है, जिससे जुलूस और सभाएं बैन हैं। TLP का मार्च अमेरिकी दूतावास के बाहर इजरायल के खिलाफ था, लेकिन सरकार ने अनुमति नहीं दी। पुलिस ने 150 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है।
TLP का मार्च फिलिस्तीन के लिए, सरकार को खतरा
TLP का मार्च गाजा में इजरायल के हमलों के खिलाफ था, जहां हजारों फिलिस्तीनी मारे गए हैं। पार्टी का कहना है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन चाहते हैं, लेकिन सरकार इसे अस्थिरता का कारण मान रही है। लाहौर की हिंसा के बाद इस्लामाबाद में कंटेनरों की दीवार खड़ी की गई है, और सुरक्षा बल तैनात हैं। यह घटना पाकिस्तान की नाजुक राजनीति को फिर उजागर कर रही है।
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