शुक्रवार सुबह काबुल के आसमान में धमाकों की गूंज से लोग डर के मारे सड़कों पर निकल आए, क्योंकि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने कथित तौर पर हवाई हमले किए, जिनका निशाना तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के ठिकाने बताए जा रहे हैं। यह हमला तब हुआ जब तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी भारत की छह दिन की यात्रा पर 9 अक्टूबर 2025 को दिल्ली पहुंचे, और दोनों देशों के बीच रिश्ते मजबूत करने की बातें चल रही हैं। पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया कि हमले में टीटीपी का सरगना नूर वली महसूद मारा गया, लेकिन महसूद ने ऑडियो बयान में कहा कि वह जिंदा और सुरक्षित है। तालिबान ने इसे पाकिस्तान की झूठी अफवाह बताया, और जांच की बात कही।
काबुल में धमाके, टीटीपी पर पाकिस्तान का निशाना
काबुल के पूर्वी हिस्से में अब्दुलहक चौक के पास दो बड़े धमाके हुए, जहां स्थानीय लोगों ने पाकिस्तानी फाइटर जेट की आवाज सुनी। पाकिस्तानी चैनलों ने कहा कि यह हमला टीटीपी के सरगना नूर वली महसूद को मारने के लिए था, जो 2018 से संगठन चला रहा है। टीटीपी ने पाकिस्तान में कई हमले किए हैं, जिसमें हाल ही में 11 सैनिक मारे गए। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक्स पर लिखा कि धमाके हुए, लेकिन कोई नुकसान नहीं हुआ। कतर में तालिबान के राजदूत मुहम्मद सुहैल शाहीन ने भी कहा कि हताहतों की कोई खबर नहीं है। यह हमला 2600 किलोमीटर लंबी अफगान-पाक सीमा पर बढ़ते तनाव को और हवा दे रहा है।
भारत-तालिबान दोस्ती से पाकिस्तान की बेचैनी
मुत्ताकी की भारत यात्रा ने पाकिस्तान को परेशान कर दिया है, क्योंकि भारत और तालिबान के बीच रिश्ते मजबूत हो रहे हैं। मुत्ताकी विदेश मंत्री एस जयशंकर से मिलेंगे, और मानवीय मदद, व्यापार व चाबहार बंदरगाह पर बात होगी। भारत ने भूकंप के बाद अफगानिस्तान को 1000 तंबू, 15 टन खाना और दवाइयां भेजीं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तालिबान को भारत का वफादार और पाकिस्तान का दुश्मन बताया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान हमेशा भारत के साथ रहा है। यह हमला पाकिस्तान की बौखलाहट का नतीजा लगता है, क्योंकि तालिबान ने पाकिस्तान से दूरी बनाकर भारत की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है।
टीटीपी और बगराम बेस का बढ़ता विवाद
पाकिस्तान को टीटीपी से बड़ा खतरा है, जिसने हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा में हमले किए। दूसरी ओर, अमेरिका बगराम एयरबेस पर वापसी चाहता है, जिसे तालिबान ने ठुकरा दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि बेस न मिला तो सैन्य कार्रवाई होगी। यह बेस शिनजियांग से 2400 किलोमीटर दूर है, और रणनीतिक रूप से अहम है। पाकिस्तान को डर है कि भारत-अफगान दोस्ती और अमेरिकी दबाव से उसकी मुश्किलें बढ़ेंगी। काबुल में यह हमला इलाके में तनाव को और गहरा रहा है।
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