सोना, जो हमेशा से अपनी चमक और कीमत के लिए जाना जाता है, वह सिर्फ खानों में ही नहीं मिलता, बल्कि अब पेड़ों के अंदर भी मिल सकता है। सुनने में यह बात किसी कहानी जैसी लगती है, लेकिन फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक ऐसी खोज की है जो पूरी तरह से सच है। उन्होंने नॉर्वे स्प्रूस नाम के पेड़ों की सुई जैसी पत्तियों में सोने के बहुत ही छोटे-छोटे कणों को ढूंढ निकाला है। ये कण इतने छोटे हैं कि इन्हें नंगी आँखों से देखना मुमकिन नहीं है, लेकिन प्रकृति का यह कमाल सोने की खोज के हमारे पुराने तरीकों को बदल सकता है।
आखिर पेड़ों में सोना पहुँचता कैसे है?
फिनलैंड में ओउलू यूनिवर्सिटी और जियोलॉजिकल सर्वे के वैज्ञानिकों ने लैपलैंड में मौजूद किटिला गोल्ड माइन के पास 23 स्प्रूस पेड़ों की 138 सुईयों की बहुत ध्यान से जाँच की। इस जाँच में उन्होंने पाया कि चार पेड़ों की सुईयों में सोने के नैनोपार्टिकल्स यानी बहुत ही बारीक कण मौजूद थे। ये कण इतने छोटे थे कि इनका आकार एक मिलियनवें मिलीमीटर जितना था। वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया को समझाते हुए बताया कि पेड़ अपनी जड़ों से मिट्टी में घुले हुए सोने को पानी के साथ सोख लेते हैं। यह घुला हुआ सोना पेड़ के तने से होते हुए ऊपर तक पहुँचता है, जहाँ पेड़ के अंदर मौजूद छोटे जीव यानी माइक्रोब्स अपना काम शुरू करते हैं। ये छोटे बैक्टीरिया जैसे कि P3OB-42, Cutibacterium और Corynebacterium सुईयों में एक चिपचिपी परत बनाते हैं, जिसे बायोफिल्म कहा जाता है, और यह परत ही घुले हुए सोने को जमा करके ठोस कणों में बदल देती है।
हर पेड़ में सोना क्यों नहीं होता, यही है बड़ा रहस्य
वैज्ञानिकों ने अपनी जाँच में यह भी पाया कि यह सोना हर स्प्रूस पेड़ में नहीं था, बल्कि सिर्फ उन चार पेड़ों में ही मिला। इसका साफ मतलब है कि मिट्टी में सोने का होना, पानी का सही बहाव और पेड़ के अंदर मौजूद माइक्रोब्स का सही मेल होना बहुत ज़रूरी है, तभी यह अद्भुत प्रक्रिया हो पाती है। यह खास खोज 28 अगस्त 2025 को ‘एनवायर्नमेंटल माइक्रोबायोम’ (Environmental Microbiome) नाम के विज्ञान जर्नल में छपी थी। रिसर्चर कैसा लेहोस्मा ने बताया कि पेड़ के अंदर मौजूद बैक्टीरिया ही सोने के बारीक कण बनाने में मदद करते हैं। यह प्रक्रिया बायोमिनरलाइजेशन कहलाती है, जिसमें जीव अपनी मदद से खनिज बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये कण इतने छोटे होते हैं कि उन्हें इकट्ठा करना आसान नहीं है, लेकिन इनकी मौजूदगी एक बड़ा इशारा करती है।
पर्यावरण को बचाते हुए सोना खोजने का नया रास्ता
पहले सोने के भंडार ढूंढने के लिए जमीन को बहुत गहराई तक खोदना पड़ता था, जिससे हमारे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुँचता था। अब यह नई खोज पेड़ों को एक संकेत (इंडिकेटर) के तौर पर इस्तेमाल करने का मौका देती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अब हम पेड़ों और उनके माइक्रोब्स को समझकर सोने के भंडार कहाँ हैं, इसका सही पता लगा सकते हैं। इस तरीके से ड्रिलिंग और खुदाई बहुत कम हो जाएगी, जिससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। यह अनोखा विज्ञान भविष्य में सिर्फ सोना खोजने में ही नहीं, बल्कि खदानों वाले इलाकों के पानी से दूसरे मेटल्स यानी धातुओं को साफ करने में भी काफी मदद कर सकता है। यह खोज वाकई में प्रकृति की चतुराई और विज्ञान के मेल का एक बेहतरीन उदाहरण है।
Keywords: Gold In Trees, Finland Discovery, Spruce Needles, Biominerals, Nature’S Gold

