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नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें कैसे मिलेगा संतान सुख और धन लाभ

शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है। इस दिन उनकी पूजा करने से काम में सफलता, संतान सुख और घर में सुख-शांति आती है।

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26 सितंबर 2025 को शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन है। इस दिन मां दुर्गा के स्कंदमाता रूप की पूजा होती है। मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं। लोग मानते हैं कि उनकी पूजा और कथा पढ़ने से काम में सफलता, संतान सुख और मां की कृपा मिलती है। इस दिन हरे रंग के कपड़े पहनकर पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। लाखों भक्त इस दिन मां की भक्ति में डूबे रहते हैं।

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स्कंदमाता की खासियत

मां स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं। उनके दाहिने ऊपरी हाथ में भगवान कार्तिकेय गोद में हैं। नीचे वाले हाथ में कमल का फूल है। बाएं ऊपरी हाथ में वरमुद्रा और नीचे वाले में भी कमल है। मां सिंह पर सवार होती हैं। उनकी पूजा से भक्तों को सुख, शांति और संतान की प्राप्ति होती है। यह पूजा नवरात्रि के हर दिन के अलग-अलग रूपों में से एक खास हिस्सा है। भक्त मां से दुआ मांगते हैं कि उनके जीवन की परेशानियां दूर हों।

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तारकासुर की कहानी

पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर नाम का राक्षस था। उसने ब्रह्मा जी की तपस्या की और अमर होने का वरदान मांगा। ब्रह्मा जी ने कहा कि हर जीव को मरना पड़ता है। तब तारकासुर ने चालाकी से कहा कि उसकी मृत्यु सिर्फ शिव जी के बेटे से हो। उसे लगा कि शिव जी का विवाह नहीं होगा, तो वह कभी नहीं मरेगा। लेकिन माता पार्वती से शिव जी का विवाह हुआ। उनके बेटे कार्तिकेय ने जन्म लिया और तारकासुर का वध किया। इस तरह मां स्कंदमाता के बेटे ने दुनिया को बचा लिया।

पूजा का सही तरीका

स्कंदमाता की पूजा सुबह जल्दी शुरू होती है। भक्त स्नान करके हरे रंग के कपड़े पहनते हैं। मां को हरे फूल, हरी चुनरी, केले, मिठाई और फल चढ़ाए जाते हैं। पूजा में दो खास मंत्रों का जाप होता है। पहला मंत्र है: “या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।” दूसरा मंत्र है: “वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्, सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्विनीम्।” ये मंत्र मां को प्रसन्न करते हैं।

कथा पढ़ने का फल

लोग मानते हैं कि स्कंदमाता की कथा पढ़ने से घर में सुख-शांति आती है। जो लोग संतान सुख चाहते हैं, उनके लिए यह कथा बहुत खास है। कथा पढ़ने और व्रत रखने से मां स्कंदमाता भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। इस दिन पूजा में हरे रंग का खास महत्व है। भक्त मां को हरे फूल और चुनरी चढ़ाकर आशीर्वाद मांगते हैं।

संतान सुख और शांति

स्कंदमाता की पूजा से न सिर्फ संतान सुख मिलता है, बल्कि जीवन की मुश्किलें भी कम होती हैं। यह पूजा भक्तों के घर में सकारात्मक ऊर्जा लाती है। नवरात्रि के इस दिन लाखों लोग मां की भक्ति में लीन रहते हैं। कथा और मंत्रों का जाप करने से मां स्कंदमाता की कृपा बनी रहती है। यह पूजा नवरात्रि का एक खास हिस्सा है।

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