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मालेगांव ब्लास्ट मामले से बरी होने के बाद श्रीकांत पुरोहित बने कर्नल, BJP ने राहुल गांधी पर ‘हिंदू विरोधी एजेंडे’ का लगाया आरोप

2008 मालेगांव ब्लास्ट केस में बरी हुए लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को सेना में कर्नल बनाया गया है। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर ‘हिंदू विरोधी एजेंडा’ चलाने का आरोप लगाया।

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मुंबई: 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में हाल ही में NIA अदालत द्वारा बरी किए गए लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को अब भारतीय सेना में कर्नल के पद पर पदोन्नत किया गया है। उनकी बहाली और पदोन्नति के साथ ही वो एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए हैं। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने उन्हें “देशभक्त” बताते हुए शुभकामनाएं दीं और कहा एक राष्ट्रभक्त सैनिक को आखिरकार न्याय मिला। यह सिर्फ पुरोहित की नहीं, देश की जीत है।

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इस फैसले के बाद BJP ने कांग्रेस और खासतौर पर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि 17 साल की प्रताड़ना और 8 साल की जेल बिना किसी सबूत के। इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने वाले एक वीर अधिकारी को जानबूझकर फंसाया गया। यह कांग्रेस का हिंदू विरोधी एजेंडा था।”

17 साल की कानूनी लड़ाई, सभी आरोपी बरी

NIA की विशेष अदालत ने 31 जुलाई 2025 को इस केस में सातों आरोपियों को बरी कर दिया, जिनमें लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित भी शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपियों का विस्फोट में कोई प्रत्यक्ष संबंध था। साथ ही कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि इस मामले में पर्याप्त सबूत नहीं थे।
इस पूरे मामले पर बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने पुरोहित की वर्दी में एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि अगर पुरोहित की सेवा बीच में न रुकी होती, तो वे आज मेजर जनरल होते। लेकिन राजनीति और तुष्टिकरण की वजह से एक ईमानदार अधिकारी की जिंदगी और करियर बर्बाद कर दिया गया।

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क्या है मालेगांव विस्फोट मामला?

29 सितंबर 2008 को रात करीब 9:30 बजे, महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव शहर में हमीदिया मस्जिद के पास खड़ी एक बाइक में विस्फोट हुआ। इस धमाके में 6 लोगों की मौत और 101 लोग घायल हुए थे।

पहले मामले की जांच एंटी टेररिज़्म स्क्वाड (ATS) ने की, बाद में इसे नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया। NIA ने आरोप लगाया था कि लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित का संबंध ‘अभिनव भारत’ नामक संगठन से था, जो कथित रूप से हिंदू राष्ट्र की स्थापना और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हमले की साजिश में शामिल था।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने NIA और आरोपियों को भेजा नोटिस

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में NIA और बरी किए गए सभी आरोपियों को नोटिस भेजा है, जिससे मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, कई विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा मामला एक राजनीतिक साजिश था जिसमें एक राष्ट्रभक्त अधिकारी को जानबूझकर फंसाया गया।

सैनिक के सम्मान की बहाली, लेकिन समय नहीं लौटेगा

रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर पुरोहित की सेवा बाधित न हुई होती, तो वे आज मेजर जनरल होते। मगर अब वे मार्च 2026 में कर्नल पद से रिटायर होंगे। उनकी यह पद बहाली सालों की कानूनी लड़ाई, सार्वजनिक समर्थन, और न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है।

बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति के चलते एक वीर सैनिक को बलि का बकरा बनाया, जबकि शिविरों में बैठा देश का रक्षक वर्षों तक अपमान और उत्पीड़न सहता रहा।

बहरहाल मालेगांव ब्लास्ट केस में कोर्ट के लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को निर्दोष करार दिए जाने के बाद ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केस केवल राजनीतिक एजेंडा था?

Keywords: Indian Army Officer Lt Col Purohit, Malegaon Blast Case 2025, Lt Col Prasad Purohit Acquitted, BJP Vs Congress On Hindu Agenda, Rahul Gandhi Anti-hindu Allegation, Nia Court Malegaon Verdict

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