अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में अमेरिकी प्रशासन ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद अब एक नया आरोप भी लगा दिया है। अमेरिका ने भारत को उन देशों की सूची में शामिल कर दिया है जो अवैध नशीली दवाओं के उत्पादन और तस्करी में शामिल हैं। इस सूची में भारत का नाम पाकिस्तान और चीन जैसे विवादित देशों के साथ जोड़ा गया है।
ट्रंप ने भारत बताया अवैध ड्रग हब
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को एक प्रमुख अवैध ड्रग उत्पादक और ट्रांजिट देश बताया है। यह बात अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई एक रिपोर्ट में कही, जिसमें उन्होंने कहा कि अवैध मादक पदार्थों का उत्पादन और तस्करी अमेरिका और उसके नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।
ट्रंप ने अमेरिकी संसद को सौंपी गई इस रिपोर्ट में कुल 23 देशों के नाम शामिल किए हैं। जिनमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन, मेक्सिको, कोलंबिया और वेनेजुएला जैसे देश शामिल हैं। ट्रंप ने विशेष रूप से अफगानिस्तान की आलोचना की, यह आरोप लगाते हुए कि वह अपने अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ विरोधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में “स्पष्ट रूप से विफल” रहा है।
अवैध दवाएं अमेरिकी समाज के लिए गंभीर खतरा
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये देश न केवल अवैध ड्रग्स का उत्पादन कर रहे हैं, बल्कि उन खतरनाक केमिकल्स का भी निर्माण कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल नशीली दवाओं के उत्पादन में किया जाता है। अमेरिका ने इस कदम को अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है, क्योंकि इन अवैध दवाओं से अमेरिकी समाज में गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं।
हालांकि भारत की तरफ से नशे के खिलाफ उठाए गए कदमों की सराहना भी की गई है। प्रेजिडेंशियल डिटर्मिनेशन रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से जिक्र है कि भारत ने ड्रग तस्करी के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं।
भारत-अमेरिका के संबंधों में नई चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में नई चुनौतियां पैदा कर सकता है। भारत ने अभी तक इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन दोनों देशों के बीच आर्थिक और सुरक्षा सहयोग पर इसका असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
भारत-अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ रहे हैं। 50 फीसदी टैरिफ के फैसले ने पहले ही दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक मतभेदों को और गहरा कर दिया था। अब ड्रग प्रोडक्शन की यह गंभीर टिप्पणी रिश्तों में और खटास ला सकती है।
आगे की कार्रवाई और दोनों देशों की प्रतिक्रिया पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस विवाद का समाधान कूटनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर ही संभव होगा।
क्या ट्रंप के दावे में सच्चाई है?
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का दावा पूरी तरह से निराधार नहीं है, लेकिन यह अधूरा है। भारत की भौगोलिक स्थिति इसे ड्रग तस्करी के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाती है। भारत 2 प्रमुख अफीम-उत्पादक क्षेत्रों, ‘गोल्डन क्रिसेंट’ (पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान) और ‘गोल्डन ट्राएंगल’ (म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) के बीच स्थित है। ये क्षेत्र भारत में ड्रग्स की तस्करी के मुख्य स्रोत हैं।
ड्रग्स तस्करी के रास्ते
- पाकिस्तान से: पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर की सीमा से हेरोइन की तस्करी की जाती है। सीमा पार ड्रोन का उपयोग भी बढ़ गया है।
- म्यांमार से: पूर्वोत्तर राज्यों (मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड) के रास्ते ड्रग्स की तस्करी होती है।
- समुद्री मार्ग से: मुंबई, गुजरात, केरल और तमिलनाडु जैसे तटीय क्षेत्रों का उपयोग सिंथेटिक ड्रग्स और उनके कच्चे माल की तस्करी के लिए किया जाता है।
- इसके अलावा, भारत में भी सिंथेटिक ड्रग्स, जैसे मेथामफेटामाइन (methamphetamine) और मेफेड्रोन (mephedrone) का अवैध उत्पादन बढ़ा है, खासकर महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों में।
भारत की कार्रवाई और चुनौतियां
- भारत सरकार और उसकी एजेंसियां, जैसे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), ड्रग्स के अवैध व्यापार के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
- जब्ती: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, साल 2024 में अकेले 16,914 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ जब्त किए गए, जो अब तक की सबसे सबसे बड़ी जब्ती थी।
- गिरफ्तारियां: ड्रग्स के अवैध उत्पादन और तस्करी में शामिल कई गिरोहों को गिरफ्तार किया गया है।
- नशा मुक्ति: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, साल 2023-24 में 5।8 लाख से अधिक लोगों को नशा मुक्ति कार्यक्रमों से मदद मिली।
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