संयुक्त राष्ट्र महासभा का सत्र हमेशा से वैश्विक नेताओं की बैठकों और समझौतों का मंच रहा है। इस बार चर्चा का केंद्र पाकिस्तान और अमेरिका की संभावित मुलाकात हो सकती है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 25 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर सकते हैं। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव लगातार सुर्खियों में हैं, वहीं पाकिस्तान और अमेरिका के बीच तालमेल बढ़ता दिख रहा है। माना जा रहा है कि यह बातचीत केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसमें क्षेत्रीय स्थिरता, अफगानिस्तान की स्थिति और वैश्विक व्यापारिक नीतियों जैसे मुद्दे भी शामिल हो सकते हैं।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की अहम भूमिका
इस मुलाकात की विशेषता यह भी है कि इसमें पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी मौजूद रहेंगे। मुनीर और ट्रंप की यह तीसरी सीधी बैठक होगी। इससे पहले दोनों की जून और अगस्त में बातचीत हो चुकी है। यह तथ्य इस ओर इशारा करता है कि पाकिस्तान की विदेश नीति में सेना की भूमिका कितनी अहम है। अमेरिकी प्रशासन भी इस बात को समझता है कि पाकिस्तान के भीतर किसी भी बड़े निर्णय में सेना की सहमति अनिवार्य होती है। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन लगातार मुनीर से संवाद बनाए रख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस साझेदारी के पीछे सुरक्षा सहयोग, खुफिया साझेदारी और मध्य एशिया में रणनीतिक उपस्थिति जैसे मुद्दे हैं।
पुतिन से मुलाकात और भारत का जिक्र
अमेरिका जाने से पहले शहबाज शरीफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिल चुके हैं। तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में दोनों नेताओं के बीच लंबी चर्चा हुई। इस दौरान शरीफ ने रूस के भारत के साथ मजबूत संबंधों का सम्मान करने की बात कही, लेकिन साथ ही पाकिस्तान-रूस संबंधों को और गहरा करने की इच्छा भी जताई। यह बयान पाकिस्तान की कूटनीतिक रणनीति को दर्शाता है, एक ओर वह भारत-रूस की निकटता को स्वीकार कर रहा है, दूसरी ओर खुद को भी रूस के लिए अहम साझेदार साबित करने की कोशिश कर रहा है। पुतिन और शरीफ की मुलाकात यह भी दर्शाती है कि पाकिस्तान अब केवल अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय बहुध्रुवीय संबंधों को साधने में दिलचस्पी दिखा रहा है।
बदलते समीकरणों में पाकिस्तान की कूटनीति
शहबाज शरीफ की ट्रंप से प्रस्तावित मुलाकात को केवल एक औपचारिक बैठक मानना भूल होगी। दरअसल, यह पाकिस्तान के लिए वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास है। अमेरिका, रूस और चीन के साथ संतुलन साधना पाकिस्तान की मौजूदा विदेश नीति का प्रमुख हिस्सा बन गया है। भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ती खटास पाकिस्तान को रणनीतिक अवसर प्रदान कर रही है। वहीं रूस के साथ संवाद बढ़ाकर पाकिस्तान यह संदेश देना चाहता है कि वह किसी एक ध्रुव पर निर्भर नहीं रहेगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि शहबाज-ट्रंप मुलाकात केवल राजनीतिक शिष्टाचार तक सीमित रहती है या फिर यह दक्षिण एशिया और वैश्विक राजनीति के समीकरणों में वास्तविक बदलाव की दिशा भी तय करती है।
Keywords – Shehbaz Sharif Trump Meeting, Pakistan Prime Minister Unga 2025, Us Pakistan Relations, Asim Munir Trump Meeting, Pakistan Army Chief Diplomacy, Shehbaz Sharif Putin Talks, Pakistan Russia Relations, Us India Trade Tensions, Pakistan Foreign Policy

