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Onam 2025: कल है उतरादम, जानें नौवें दिन की उत्सव भरी शुरुआत और परंपराओं के बारे में

केरल में ओणम का उत्सव उतरादम के दिन से शुरू होता है, जब परिवार खेतों से ताजा उपज लाकर वरिष्ठ सदस्य को ओनाकाज़्चा भेंट करते हैं। ये सार्वजनिक अवकाश का दिन होता है।

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Onam 2025: केरल का सबसे जीवंत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध फसल उत्सव ओणम की शुरुआत हो चुकी है, और कल यानी 4 सितंबर को इसका नौवां दिन है, जिसे उतरादम कहा जाता है। ये 10 दिवसीय उत्सव राजा महाबली की वापसी की खुशी में चिंगम महीने में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। ये दिन न केवल उत्साह और परंपराओं से भरा होता है, बल्कि सामुदायिक एकता और पारिवारिक बंधन को भी मजबूत करता है। आइए, उतरादम के दिन की खासियतों और इसकी परंपराओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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उतरादम: ओणम की भव्य शुरुआत

केरल के कुछ हिस्सों में, उतरादम को ओणम के उत्सव का प्रारंभिक दिन माना जाता है। ये दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि ये परिवारों और समुदायों को एकजुट करने का अवसर प्रदान करता है। उतरादम को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है, जिससे लोग पूरे उत्साह के साथ इस दिन की तैयारियों में जुट जाते हैं। ये दिन पारंपरिक रीति-रिवाजों, पारिवारिक एकता, और सांस्कृतिक गतिविधियों का संगम है।

परंपराएं और रीति-रिवाज

उतरादम के दिन, परिवार के लोग अपने खेतों से ताजा उपज इकट्ठा करते हैं, जो फसल उत्सव की भावना को दर्शाता है। ये उपज परिवार के सबसे बड़े या वरिष्ठ सदस्य को भेंट की जाती है, जिसे ओनाकाज़्चा (Onakazhcha) के रूप में जाना जाता है। ये उपहार न केवल खेतों की समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि परिवार के प्रति सम्मान और एकता की भावना को भी व्यक्त करता है।

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वरिष्ठ सदस्य इस उपहार को स्वीकार करता है और अगले दिन, यानी थिरुवोणम (दसवें दिन), के लिए एक भव्य भोज की व्यवस्था करता है। ये भोज, जिसे ओणम साध्या कहा जाता है, केरल की सांस्कृतिक और पाककला विरासत का एक अनूठा प्रदर्शन है। इसमें 26 से अधिक पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं, जो नारियल, चावल, दाल, और स्थानीय मसालों से तैयार किए जाते हैं।

उतरादम का महत्व

उतरादम का दिन परिवारों को एक साथ लाने और सामुदायिक बंधन को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। ये दिन फसल की समृद्धि और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का समय है। खेतों से लाई गई ताजा उपज न केवल आर्थिक समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि ये भी दर्शाती है कि केरल की संस्कृति में कृषि और प्रकृति का कितना महत्व है।

इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं, खासकर पूककलम (फूलों की रंगोली) को और भव्य बनाते हैं। पूककलम राजा महाबली के स्वागत का प्रतीक है और इसे हर दिन और अधिक जटिल और रंगीन बनाया जाता है। कई परिवार इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना भी करते हैं, जिससे उत्सव में आध्यात्मिकता का रंग जुड़ता है।

सामुदायिक उत्साह और तैयारियां

उतरादम के दिन, गांवों और शहरों में उत्सवी माहौल देखने को मिलता है। लोग नए कपड़े पहनते हैं, रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं, और अगले दिन के भव्य उत्सव की तैयारियों में जुट जाते हैं। कुछ क्षेत्रों में छोटे-मोटे सांस्कृतिक कार्यक्रम, जैसे पारंपरिक नृत्य और संगीत, भी आयोजित किए जाते हैं। ये दिन न केवल परिवारों को एकजुट करता है, बल्कि समुदायों को भी आपस में जोड़ता है।

थिरुवोणम की ओर कदम

उतरादम का दिन थिरुवोणम, ओणम के सबसे महत्वपूर्ण दिन, की प्रस्तावना है। इस दिन की तैयारियां अगले दिन के भव्य भोज और उत्सव के लिए मंच तैयार करती हैं। ओनाकाज़्चा की परंपरा और सामुदायिक एकता इस दिन को विशेष बनाती है, जो केरल की सांस्कृतिक और सामाजिक समृद्धि को दर्शाती है।

उतरादम का दिन ओणम के 10 दिवसीय उत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो परिवार, समुदाय, और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को एक साथ लाता है। ओनाकाज़्चा की परंपरा, खेतों की ताजा उपज, और भव्य भोज की तैयारियां इस दिन को यादगार बनाती हैं। ये दिन न केवल राजा महाबली के स्वागत की तैयारी है, बल्कि केरल की सांस्कृतिक धरोहर और सामुदायिक एकता का उत्सव भी है।

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