भारतीय वायुसेना को और मजबूत करने के लिए भारत अब अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में है। 114 विमानों की खरीद से जुड़ा अनुरोध पत्र (LoR) अंतिम चरण में पहुंच गया है। यह कदम वायुसेना की ताकत बढ़ाने और फाइटर जेट की कमी को पूरा करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक 114 राफेल विमानों में से करीब 90 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। इनका निर्माण फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन और एक भारतीय कंपनी की साझेदारी से होगा। बाकी विमान सीधे तैयार हालत में भारत को दिए जाएंगे।
क्या है राफेल डील की प्रक्रिया?
LoR एक आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसके जरिए किसी देश से सैन्य उपकरण खरीदने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसमें जरूरत, संख्या और तकनीकी जानकारी दी जाती है। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने तीन महीने पहले राफेल खरीद प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसके बाद यह पत्र तैयार किया गया।
फ्रांस से कीमत, उपलब्धता और लॉजिस्टिक सपोर्ट की पूरी जानकारी मिलने के बाद भारत औपचारिक रूप से प्रस्ताव अनुरोध (RFP) जारी करेगा। इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत होगी और अंतिम डील को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की मंजूरी मिलेगी। सरकार इस समझौते को इस साल के अंत तक पूरा करने की योजना बना रही है।
राफेल डील पर तेज हुई कूटनीतिक हलचल
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह जल्द ही फ्रांस का दौरा करेंगे, जहां राफेल खरीद से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी जून के अंत में फ्रांस जाने की संभावना है। भारत पहले से ही 36 राफेल विमान संचालित कर रहा है, जबकि नौसेना के लिए 26 राफेल-एम विमान शामिल करने की योजना पर काम चल रहा है।
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