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तमिलनाडु में लहराया ‘थलापति’ का परचम, जानें विजय की लोकप्रिय अभिनेता से जननेता बनने की कहानी…

तमिलनाडु में ‘थलापति’ विजय का सियासी जलवा दिख रहा है। सुपरस्टार से जननेता बने विजय ने अपनी लोकप्रियता के दम पर राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई और जनता के बीच नई पहचान बनाई है।

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तमिल सुपरस्टार विजय, जिनका पूरा नाम जोसेफ विजय चंद्रशेखर है, ने 2024 में एक्टिंग छोड़ने का ऐलान कर सभी को चौंका दिया था। अब 2026 के तमिलनाडु चुनावों में उनकी राजनीतिक पारी पर सबकी नजरें टिकी हैं। राज्य की राजनीति में फिल्मी सितारों का प्रभाव पहले भी देखा जा चुका है, जब एमजीआर और जयललिता जैसे बड़े अभिनेता मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन उस दौर को काफी समय बीत चुका है।

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करीब तीन दशक बाद तमिलनाडु में किसी अभिनेता से इतनी मजबूत राजनीतिक मौजूदगी की उम्मीद की जा रही है, जो कमल हासन और रजनीकांत जैसे बड़े नाम भी स्थापित नहीं कर सके। विजय ने महज दो साल पहले राजनीति में कदम रखा था, और इन चुनावों में उनका प्रदर्शन ही उनकी रणनीति और मेहनत का असली पैमाना होगा। उनकी जीत का स्तर तय करेगा कि उनका यह सियासी सफर कितना सफल रहा है।

तमिल युवाओं की नई उम्मीदें और सवाल

तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से द्रविड़ विचारधारा के इर्द-गिर्द घूमती रही है, जहां सामाजिक न्याय और पहचान की राजनीति को अहम स्थान मिला है। लेकिन अब युवाओं के बीच नई तरह की बेचैनी देखने को मिल रही है। वे जानना चाहते हैं कि आगे का रास्ता क्या होगा, रोजगार के अवसर कहां हैं और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं क्यों बनी हुई हैं। लोग अब केवल पहचान की राजनीति नहीं, बल्कि विकास और पारदर्शिता भी चाहते हैं।

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1990 के दशक से स्टार बने विजय ने अपनी फिल्मों में अक्सर सिस्टम के खिलाफ खड़े आम आदमी की छवि निभाई। उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर की फिल्म रसिगन (1994) से उन्हें ‘इलयाथलपति’ यानी युवा नेता की पहचान मिली। थुपक्की, थलाइवा, कथ्थी और मर्सल जैसी फिल्मों में उन्होंने भ्रष्टाचार, कॉर्पोरेट दबाव और सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाई। इन किरदारों ने उनकी छवि एक मजबूत और जनता से जुड़े नेता के रूप में स्थापित कर दी, जिसे बाद में ‘थलपति’ का दर्जा मिला।

तमिलनाडु की राजनीति में द्रविड़ आंदोलन से उभरी दो प्रमुख पार्टियां (DMK और AIADMK) अब विरासत आधारित राजनीति का प्रतीक बन चुकी हैं। DMK का नेतृत्व करुणानिधि परिवार के हाथों में केंद्रित है, जबकि AIADMK में नेतृत्व उन्हीं नेताओं के पास रहता है जो MGR और जयललिता की विरासत से खुद को जोड़ते हैं।

विरासत से अलग नई राजनीति की दिशा

विजय ने तमिलनाडु की राजनीति में खुद को एक अलग पहचान के साथ स्थापित किया है। वे किसी राजनीतिक परिवार से नहीं आते और न ही धर्म या जाति आधारित राजनीति पर जोर देते हैं। उनका ध्यान बेहतर शासन, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने पर है। वे द्रविड़ विचारधारा का सम्मान करते हुए भविष्य की राजनीति और विकास की दिशा में आगे बढ़ने की बात करते हैं, जिससे वे नई सोच का प्रतिनिधित्व करते नजर आते हैं।

बड़े सितारे, लेकिन सियासत में अधूरी राह

तमिल सिनेमा के दो बड़े नाम रजनीकांत और कमल हासन राजनीति में अपनी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। रजनीकांत ने 2017 में सियासत में आने का ऐलान किया था और उनके फैन क्लब्स ने एक संगठन भी बनाया, लेकिन उनकी राजनीतिक दिशा और विचार जनता से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए। खासकर राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर उनका रुख तमिलनाडु के मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर सका, जिसके चलते उनका राजनीतिक सफर आगे नहीं बढ़ पाया।

कमल हासन ने 2018 में अपनी पार्टी मक्कल नीधि मय्यम के साथ राजनीति में कदम रखा, लेकिन उनके पास मजबूत जमीनी नेटवर्क की कमी साफ दिखी। रजनीकांत और कमल दोनों ही अपने स्टारडम को राजनीति में बदलने की कोशिश करते नजर आए, जो ज्यादा असरदार नहीं रहा। इसके उलट विजय ने न सिर्फ अपनी लोकप्रियता का सही उपयोग किया, बल्कि जमीनी स्तर पर पकड़ बनाकर खुद को एक मजबूत राजनीतिक चेहरा साबित किया।

आखिरी फिल्म बनी सियासी लॉन्चपैड

चुनाव से पहले विजय ने ऐलान किया कि ‘जन नायगन’ उनके अभिनय करियर की अंतिम फिल्म होगी। जनवरी में रिलीज होने वाली यह फिल्म उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत के लिए अहम मानी जा रही थी। जहां आम नेताओं को अपने विचार जनता तक पहुंचाने के लिए कई रैलियां करनी पड़ती हैं, वहीं एक फिल्म स्टार के लिए सिनेमा ही सबसे बड़ा माध्यम बन जाता है। ‘जन नायगन’ को भी इसी तरह विजय के संदेश और एजेंडे को लोगों तक पहुंचाने का मजबूत जरिया माना गया।

सेंसर बोर्ड पर केंद्र सरकार के प्रभाव की चर्चा के बीच ‘जन नायगन’ का अटकना सिर्फ फिल्मी मुद्दा नहीं रहा। तमिलनाडु में राष्ट्रीय पार्टियां भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं और ऐसे में विजय की फिल्म को लेकर विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया। राज्य की पारंपरिक पार्टियों के मुकाबले में यह मामला चुनावी माहौल में बड़ा मुद्दा बन गया, जिसे जनता भी समझ रही है।

विजय की जीत क्यों बनी चर्चा का केंद्र

तमिलनाडु ही नहीं, देशभर के लोग विजय की राजनीतिक पारी पर नजर रखे हुए हैं। फिल्मी दुनिया में उनकी लोकप्रियता ने उनकी सियासी एंट्री को और चर्चा में ला दिया है। भले ही उनकी विचारधारा हर किसी को पूरी तरह स्पष्ट न हो, लेकिन उन्होंने यह धारणा जरूर बना ली है कि वे अपनी राजनीतिक भूमिका को लेकर गंभीर हैं और इसे लंबे समय तक निभाने के लिए तैयार हैं।

राजनीति में वही सफलता पाता है जो इसे गंभीरता से लेता है, और यही बात विजय को बाकी फिल्मी सितारों से अलग बनाती है। जहां कई बड़े स्टार्स की राजनीतिक कोशिशों में यह कमी दिखी, वहीं कुछ उदाहरणों ने साबित किया है कि प्रतिबद्धता हो तो जनता समर्थन देती है। भले ही इस बार मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद कम हो, लेकिन इस चुनाव में विजय का प्रदर्शन उनके भविष्य की राजनीति तय करेगा, इसलिए सभी की नजरें उनके नतीजों पर टिकी हैं।

Keywords: Tamil Nadu Election 2026 Analysis, Thalapathy Vijay Political Journey, TVK Party Vijay Election Performance

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