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ट्रंप ने पुतिन की ईरान पर मदद ठुकराई, परमाणु यूरेनियम को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने खुलासा किया है कि रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने फोन पर बातचीत के दौरान ईरान के संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) को लेकर मदद की पेशकश की थी।

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वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने फोन पर बातचीत के दौरान ईरान के संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) को लेकर मदद की पेशकश की थी। हालांकि ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि रूस पहले यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर ध्यान दे। इस बीच परमाणु निगरानी संस्था International Atomic Energy Agency (IAEA) ने भी संकेत दिए हैं कि रूस, ईरान के यूरेनियम भंडार को हटाने के विकल्प पर अब भी खुला रुख रखता है।

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ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि “ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।” उनका दावा है कि पिछले करीब दो महीनों से जारी संघर्ष में अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी कमजोर कर दिया है। ट्रंप ने संवर्धित यूरेनियम को “न्यूक्लियर डस्ट” बताते हुए इसे खतरे की सबसे बड़ी वजह बताया।

ईरान के पास कितना है संवर्धित यूरेनियम?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के पहले कार्यकाल में ट्रंप द्वारा परमाणु समझौते से अलग होने के बाद ईरान ने तेजी से यूरेनियम का भंडार बढ़ाया। अनुमान है कि ईरान के पास करीब 11 टन संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। हालांकि इस स्टॉक की सटीक स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। IAEA का मानना है कि इसका बड़ा हिस्सा Isfahan nuclear complex में रखा गया है, जिस पर पिछले साल और इस साल हमले भी हो चुके हैं।

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IAEA प्रमुख Rafael Grossi के अनुसार, 2025 में हुए संघर्ष के दौरान भी बड़ी मात्रा में हाई-एनरिच्ड यूरेनियम इसी परिसर में मौजूद था और अब भी वहीं होने की संभावना है।

क्यों बढ़ रही है चिंता?

यूरेनियम का इस्तेमाल जहां कम स्तर पर बिजली उत्पादन में होता है, वहीं ज्यादा शुद्धता पर यही परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। IAEA के अनुसार ईरान के पास करीब 440.9 किलोग्राम यूरेनियम ऐसा है जिसे 60% तक संवर्धित किया जा चुका है, जो 90% (हथियार-ग्रेड) स्तर से ज्यादा दूर नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक बार यूरेनियम 20% से ऊपर पहुंच जाता है, तो उसे हथियार-स्तर तक ले जाना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।

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