नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एलपीजी गैस की गंभीर कमी से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इसका असर घरों के साथ-साथ उद्योगों पर भी पड़ा है। गैस न मिलने से फैक्ट्रियों का काम धीमा हो गया है और उत्पादन करीब 20 फीसदी तक घट गया है। वहीं कामगारों को रोज़गार और भोजन की दिक्कत होने लगी है, जिसके चलते कई लोग मजबूरी में अपने गांव लौटने लगे हैं।
गैस संकट से ठप उद्योग, मजदूरों का पलायन तेज
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एलपीजी की भारी कमी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। घरों की रसोई से लेकर फैक्ट्रियों तक कामकाज पर असर साफ दिख रहा है। गैस की कमी के कारण उत्पादन में लगभग 20% की गिरावट आई है। रोजगार घटने और खाने-पीने की परेशानी बढ़ने से मजदूर अब अपने गांवों की ओर लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
गैस के लिए लंबी लाइनें लगा रहे मजदूर
गैस की किल्लत ने मजदूरों की हालत और मुश्किल कर दी है। खाना बनाने का साधन नहीं बचा और बाहर मिलने वाला खाना भी कम हो गया है, जिससे लोगों को भूखे रहने की नौबत आ रही है। शहर की गैस एजेंसियों पर सुबह 6 बजे से ही भीड़ जुटने लगती है, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी कई लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा और वे निराश लौट रहे हैं।
राहत पैकेज और तेज़ पीएनजी कनेक्शन की मांग
औद्योगिक इलाकों में कैंटीन और छोटे ढाबे बंद होने से मजदूरों की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं। हालात बिगड़ते देख उद्यमियों और संगठनों ने प्रशासन से पीएनजी कनेक्शन जल्द देने की मांग उठाई है। साथ ही प्रभावित उद्योगों के लिए राहत पैकेज लाने की अपील की गई है, ताकि कामकाज पटरी पर लौटे और मजदूरों का पलायन रोका जा सके।
उत्पादन में गिरावट, उद्योगों पर संकट गहराया
कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और कामगारों के पलायन से नोएडा-ग्रेटर नोएडा के उद्योग दबाव में हैं। कई फैक्ट्रियों में उत्पादन 15-20% तक कम हो गया है, जिससे निर्यात ऑर्डर समय पर पूरा करना मुश्किल हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही हाल रहा तो इंडस्ट्री की स्थिति और बिगड़ सकती है।
वहीं, सूक्ष्म और लघु उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कमर्शियल एलपीजी की कमी के चलते उद्यमी पीएनजी कनेक्शन लेने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन महंगा खर्च और लंबा इंतजार उनकी परेशानी और बढ़ा रहा है।
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