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यूपी में चुनाव से पहले बदले राजनीती समीकरण, नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत कई बड़े नेता अखिलेश यादव की सपा में शामिल

बसपा और कांग्रेस छोड़कर सपा में आए नेताओं के कार्यक्रम में दिलचस्प माहौल रहा। भाषण के दौरान कुछ नेता गलती से अपनी पुरानी पार्टी का नाम ले बैठे, जिससे यूपी की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गईं

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अगले साल आनेवाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए कई प्रभावशाली नेताओं को अपने पाले में शामिल किया है। कांग्रेस छोड़ने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सपा का दामन थाम लिया है। उनके साथ अपना दल (सोनेलाल) के पूर्व विधायक राजकुमार पाल, अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू, पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा और डॉक्टर दानिश खान, जो पहले AIMIM और कांग्रेस से जुड़े रहे हैं, भी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं। इन नेताओं के आगमन को चुनाव से पहले सपा के लिए अहम राजनीतिक मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है।

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सपा जॉइन करते ही जुबान फिसली, पुरानी पार्टी का नाम ले बैठे नेता

समाजवादी पार्टी में शामिल होने के दौरान कुछ नेताओं की जुबान फिसलती नजर आई। अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू, जो बसपा छोड़कर सपा में आए हैं, अपने संबोधन के दौरान कई बार बहुजन समाज पार्टी का नाम लेते रहे और यहां तक कह दिया कि बीजेपी को अगर कोई हरा सकता है तो वह बसपा है। हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी बात को संभालते हुए सुधार किया। इसी तरह नसीमुद्दीन सिद्दीकी भी अपने भाषण में बसपा का जिक्र कर बैठे, लेकिन तुरंत अपनी टिप्पणी दुरुस्त कर दी। कार्यक्रम के दौरान यह घटनाक्रम चर्चा का विषय बना रहा।

24 जनवरी को कांग्रेस से किया था किनारा

उत्तर प्रदेश की सियासत में मजबूत पकड़ रखने वाले वरिष्ठ मुस्लिम नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 24 जनवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। वह पार्टी में प्रांतीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे थे। उनके इस्तीफे को प्रदेश की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना गया, क्योंकि लंबे समय से वह कांग्रेस का प्रमुख चेहरा रहे थे।

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एयरपोर्ट विवाद के बाद बढ़ी नाराज़गी

सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में जब राहुल गांधी रायबरेली जाने के सिलसिले में लखनऊ पहुंचे थे, तब एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव करने पहुंचे नसीमुद्दीन सिद्दीकी को अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। बताया जाता है कि उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस लौटना पड़ा। इस घटनाक्रम से नाराज़ होकर नसीमुद्दीन ने कांग्रेस से दूरी बना ली और बाद में पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

मायावती सरकार में चार बार संभाली थी कैबिनेट जिम्मेदारी

इस्तीफे के बाद यह भी कयास लगाए जा रहे थे कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी दोबारा बहुजन समाज पार्टी का रुख कर सकते हैं। वह कांशीराम के दौर से ही बसपा से जुड़े रहे और मायावती के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। मायावती जब-जब उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं, हर कार्यकाल में नसीमुद्दीन सिद्दीकी को कैबिनेट मंत्री के रूप में अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। चारों बार वह सरकार का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे।

2017 में बसपा से बाहर, 2018 में कांग्रेस में एंट्री

मायावती ने वर्ष 2017 में नसीमुद्दीन सिद्दीकी को बहुजन समाज पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद 2018 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया और पार्टी की सक्रिय राजनीति में भूमिका निभाई। वहीं अनीस अहमद खान उर्फ फूल बाबू पीलीभीत से तीन बार विधायक रह चुके हैं। वे भी मायावती सरकार में मंत्री पद संभाल चुके हैं और प्रदेश की राजनीति में उनका अपना प्रभाव माना जाता है।

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