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देशभर में गड्ढों से प्रतिदिन हो रही 6 लोगो की मौत, पांच साल में 9 हजार से ज्यादा लोगो ने गंवाई अपनी जान

देशभर में गड्ढों से जुड़े हादसों में हर दिन 6 लोगों की मौत हो रही है। 2019 से 2023 तक गड्ढों के कारण 9,000 से ज्यादा जानें चली गईं, यूपी सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है।

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सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2019 से 2023 के बीच देशभर में गड्ढों के कारण हुए सड़क हादसों में 9,109 लोगों की जान चली गई। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। 2022 में जहां इन हादसों में 1,856 मौतें हुईं, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 2,161 तक पहुंच गई। इसका मतलब है कि पिछले साल औसतन हर दिन छह लोग गड्ढों से जुड़ी दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा रहे थे। यह गड्ढे खासतौर पर दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए खतरे की बड़ी वजह बने हैं, और मानसून के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। हाल ही में दिल्ली के जनकपुरी इलाके में जल बोर्ड द्वारा खोदे गए गड्ढे में गिरने से 25 वर्षीय कमल नामक युवक की मौत हो गई।

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अदालतों की चेतावनी का नहीं पड़ रहा कोई असर

बंबई हाईकोर्ट ने अक्टूबर में सड़क गड्ढों से संबंधित मौतों पर सुनवाई करते हुए मृतकों के परिजनों को कम से कम छह लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया था। इससे पहले जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सड़कों पर गड्ढों से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर टिप्पणी की थी, लेकिन इन अदालतों की फटकार के बावजूद गड्ढों की समस्या बढ़ती जा रही है।

परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों पर बने गड्ढे विशेषकर दोपहिया वाहनों के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। जिम्मेदार विभाग जैसे नगर निगम और लोक निर्माण विभाग अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभा नहीं पा रहे। मानसून में जलभराव, खराब ड्रेनेज सिस्टम और घटिया निर्माण सामग्री के कारण सड़कों पर गड्ढे बनते हैं। इसके अलावा, बिजली और जल निगम के द्वारा सड़कों पर गड्ढे खोदने के बाद उन्हें जस का तस छोड़ देना भी इस समस्या को बढ़ाता है।

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सड़क गड्ढों से होने वाले हादसों की बढ़ती संख्या पर चिंता

गैर-सरकारी संगठन के संयोजक मोहम्मद तस्लीम के अनुसार, सड़क गड्ढों के कारण हर दिन औसतन 19 हादसे होते हैं, जिनमें छह लोगों की जान चली जाती है, और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। ऐसे हादसों में होने वाले नुकसान का कोई ठोस आंकड़ा भी नहीं है। कानूनी दृष्टिकोण से मुआवजे का दावा किया जा सकता है, लेकिन न्याय प्रक्रिया लंबी और जटिल होने के कारण जीत की कोई गारंटी नहीं होती। कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील दीपक कुमार ने बताया कि कानूनी खामियों के कारण कई विभाग आपस में आरोप-प्रत्यारोप कर बच निकलते हैं।

परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ जगहों पर तकनीकी उपायों से गड्ढों का पता लगाकर मरम्मत की जा रही है, लेकिन यह नाकाफी है। समरेश भट्टाचार्य ने सुझाव दिया कि विभागों की जिम्मेदारी तय की जाए और तय समय सीमा के भीतर गड्ढों की मरम्मत न करने पर उन्हें जुर्माना लगाया जाए। मोहम्मद तस्लीम ने कहा कि यह समस्या तकनीक या पैसों की नहीं, बल्कि संबंधित विभागों की लापरवाही और सोच की है।

Keywords: Pothole Accidents In India, Road Safety In India, Pothole Deaths Statistics, Legal Actions Against Potholes

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