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Rupee Vs Dollar: डॉलर के मुकाबले भारत का रुपया हो रहा कमजोर लेकिन, अफगानिस्तान की करेंसी पर क्यों नहीं पड़ रहा फर्क?

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है, जो मुख्य रूप से भारी विदेशी निवेश की निकासी, ग्लोबल रिस्क से बचाव, और मजबूत डॉलर के कारण हुआ है।

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भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है, जो मुख्य रूप से भारी विदेशी निवेश की निकासी, ग्लोबल रिस्क से बचाव, और मजबूत डॉलर के कारण हुआ है। 2026 में रुपया एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बनकर उभरा है, और यह 91.96 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर पहुंच चुका है। हालांकि, इस ग्लोबल करेंसी संकट के बीच, एक हैरान करने वाला सवाल यह उठता है कि अफगानिस्तान की करेंसी पर इसका असर क्यों नहीं पड़ा। आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण।

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भारतीय रुपया क्यों हो रहा है इतनी तेजी से कमजोर?

भारतीय रुपया की गिरावट ग्लोबल और डोमेस्टिक फाइनेंसियल दबावों से प्रभावित है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा बढ़ाई गई ब्याज दरों के कारण डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे उभरते बाजारों की करेंसी में गिरावट आई है। इसके अलावा, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) ने जनवरी 2026 में भारतीय शेयर बाजार से भारी निकासी की, जिससे रुपये को डॉलर में बदला गया और इसकी गिरावट तेज हो गई। साथ ही, यूक्रेन से लेकर मध्य पूर्व तक की भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए नए टैरिफ खतरों ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ दिया। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) डॉलर बेचकर हस्तक्षेप कर रहा है, फिर भी रुपये पर दबाव बना हुआ है।

अफगानी रूपया की स्थिरता का राज

अफगानिस्तान की करेंसी की स्थिरता पहले नजर में हैरान करने वाली लग सकती है, खासकर जब अफगानिस्तान के पास कोई मजबूत निर्यात नहीं है, ग्लोबल कैपिटल मार्केट से कोई संपर्क नहीं है और उस पर कई प्रतिबंध भी हैं। फिर भी अफगानी करेंसी अन्य उभरते बाजारों या फ्रंटियर करेंसी की तरह कमजोर नहीं हुई। इसका कारण यह है कि अफगानिस्तान की करेंसी की स्थिरता बाजार के बजाय प्रशासनिक प्रयासों पर निर्भर है।

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विदेशी करेंसी के उपयोग पर पूरी पाबंदी

अफगानी करेंसी की स्थिरता की सबसे बड़ी वजह यह है कि अफगानिस्तान में घरेलू लेन-देन में विदेशी करेंसी का इस्तेमाल लगभग पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। तालिबान प्रशासन ने अमेरिकी डॉलर और पाकिस्तानी रुपये के उपयोग पर कड़ी रोक लगा दी है। अब किराने का सामान हो या किराया, सभी लेन-देन अफगानी में ही किए जाने चाहिए। इस नीति के कारण स्थानीय करेंसी की मांग में निरंतरता बनी रहती है, जिससे अफगानी की स्थिरता सुनिश्चित होती है।

डॉलर की आवाजाही और फॉरेक्स गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण

अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक, दा अफगानिस्तान बैंक ने डॉलर की निकासी और कैश की सीमा पार आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। जनवरी 2026 में अफगानिस्तान ने ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया, ताकि सट्टेबाजी और पूंजी पलायन को रोका जा सके। भारत के विपरीत, जहां करेंसी मार्केट खुले हैं, अफगानिस्तान ने अपनी करेंसी और फॉरेक्स गतिविधियों को प्रभावी तरीके से अलग कर लिया है, जिससे वह बाहरी वित्तीय दबावों से बचा हुआ है।

मानवीय सहायता से अफगान करेंसी को मिल रही स्थिरता

रोचक बात यह है कि अफगानिस्तान पर लगाए गए प्रतिबंधों ने उसकी करेंसी की स्थिरता में मदद की है। क्योंकि अफगानिस्तान ग्लोबल बैंकिंग सिस्टम से कट चुका है, इसलिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां और अंतरराष्ट्रीय एनजीओ हर सप्ताह मानवीय सहायता के रूप में लाखों डॉलर कैश भेजते हैं। यह निरंतर डॉलर की आपूर्ति लोकल बाजार में स्थिरता बनाए रखती है, जिससे मुद्रा में गिरावट को रोकने में मदद मिलती है और डॉलर की कमी से होने वाली समस्याएं टल जाती हैं।

आयात में कमी से डॉलर की मांग में गिरावट

अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था में आई तेजी से गिरावट के कारण आयात में भारी कमी आई है। जब कोई देश कम आयात करता है, तो उसे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान करने के लिए कम डॉलर की आवश्यकता होती है। इस कम होती डॉलर की मांग के चलते अफगानी करेंसी पर दबाव कम हो जाता है, जिससे उसकी स्थिरता बनी रहती है।

नई करेंसी की छपाई पर सख्त निगरानी

अफगानी की स्थिरता में एक और अहम कारण मौद्रिक अनुशासन है। तालिबान प्रशासन ने पिछले कुछ सालों में नए अफगानी नोटों की छपाई पर कड़ी निगरानी रखी है, ताकि ज्यादा मुद्रा की आपूर्ति से बचा जा सके। सीमित करेंसी का सर्कुलेशन और इसके उपयोग पर लगाए गए प्रतिबंधों ने अफगानी की मूल्य स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। इस तरह की पॉलिसी ने मुद्रा के अवमूल्यन को रोकने में मदद की है।

Keywords: Indian Rupee, US Dollar, Afghani Currency, Forex Market, RBI Intervention, Taliban Economy, Dollar Strength, Emerging Markets

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