तेहरान: ईरान की सड़कों पर गुस्सा साफ दिख रहा है। खामेनेई सरकार के खिलाफ लोगों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ चुका है। पिछले दो हफ्तों से लाखों लोग सड़कों पर हैं। देशभर के कई बड़े शहरों में लगातार प्रदर्शन चल रहा है। टाइम मैगजीन के अनुसार, डॉक्टरों ने बताया, तेहरान में 200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। जिसकी वजह है सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं। सरकार अब भी मरने वालों की आधिकारिक गिनती नहीं बता रही। उधर, सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने तो इन सबको “विदेशी साजिश” कह दिया, और अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह ईरानी जनता को भड़का रहा है।
सुरक्षा बलों की सख्ती
ये आंदोलन एक शहर तक नहीं रुका। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर का कहना है कि 7 जनवरी के बाद से विरोध पूरे देश में फैल गया। पहले कुछ शहरों में प्रदर्शन हुए, फिर यूनिवर्सिटी कैंपस, बाजार, छोटे कस्बे, हर जगह लोग जुड़ते गए। हालात काबू करने के लिए सरकार ने सुरक्षा घेराबंदी बढ़ा दी। कई संवेदनशील इलाकों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) तैनात है। जगह-जगह चेकपॉइंट्स, धरपकड़, डराने-धमकाने की कोशिशें जारी हैं। सरकार तो कहती है ‘कानून-व्यवस्था’ बनाए रखने के लिए सब कर रहे हैं, लेकिन मानवाधिकार संगठन इसे खुला दमन मान रहे हैं।
पुरे देश में इंटरनेट बंद
जैसे-जैसे विरोध तेज हुआ, सरकार ने इंटरनेट बंद कर दिया। सोशल मीडिया तक पहुंचना मुश्किल हो गया। फोटो-वीडियो बाहर आना बंद हो गए, लेकिन हालत छुप नहीं पाए। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी, ईरान ह्यूमन राइट्स और हेंगाव जैसी संस्थाओं ने बताया कि शुरुआती आंकड़ों में कम से कम 62 मौतें और करीब 2,300 गिरफ्तारियां सामने आई थीं।
आर्थिक बदहाली बनी विरोध की जड़
इन सबकी जड़ में है ईरान की बिगड़ती अर्थव्यवस्था। सालों से अमेरिका-यूरोप के प्रतिबंधों ने हालात खराब कर दिए हैं। ऊपर से परमाणु कार्यक्रम पर तनाव, पड़ोसी देशों से झगड़े, और पिछले साल इजरायल के साथ 12 दिन की जंग, इन सबने हालात बदतर कर दिए। ईरानी रियाल का हाल ये है कि 2025 में डॉलर के मुकाबले इसकी वैल्यू लगभग आधी रह गई। दिसंबर में महंगाई 42 फीसदी से ऊपर थी, रोजमर्रा की चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर जा रही हैं। शुरुआत में व्यापारियों ने रियाल के गिरने पर आवाज उठाई थी, लेकिन अब गुस्सा छात्रों, नौजवानों और आम लोगों तक फैल गया है। ये आंदोलन अब सिर्फ महंगाई का नहीं, बल्कि राजनीति और समाज की आवाज बन चुका है।
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